Sunday 25th of October 2026 08:12:55 AM

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Category: कविता

25 Dec

” परवाह “

परवाह हमेशा उसकी करो     जो तेरी परवाह करे      फिक्र तुम सदा उसकी करो      जो तुझे कभी तन्हा ना करे ।         जान

4 Dec

” मेरे प्रभु “

प्रभु , तेरी ये कैसी रीति है  कैसा तेरा है न्याय , कि सीधे सच्चे लोग को ही  सहना पड़े अन्याय ।    झूठे की आंख में शर्म नहीं  पर

19 Nov

लक्ष्मीबाई

लक्ष्मीबाई नाम था जिसका झांसी जिसका वास था  दुश्मनों के छक्के छुड़ाना  हरदम जिसका काम था।    वो झांसी की रानी थी  वीर थी और मर्दानी थी इसीलिए इतिहास में

31 Oct

आओ मिलकर दीप जलाएं

आओ मिलकर दीप जलाएं। जगमग करे कोना – कोना।  किला, कुटिया  कंदराएं  आओ मिलकर दीप जलाएं।   लोभ, लालच, द्वेष, दुष्टता  और अपनी – अपनी धृष्टताएं। जलते दीपों के उजियारों

15 Aug

स्वतंत्रता दिवस

दिल  में  हमारे  ये अरमान जागे  हो अपना सबसे  हिन्दुस्तान आगे।    राष्ट्रप्रेम हो हमारे  रगों   रगों    में  रहे अपना इतिहास अमर   युगों युगों में।   तिरंगा  की  शान 

29 Jun

बेवफाई

अधूरे ख्वाब सा तू ने                अंधेरी राह में छोड़ा          बहुत उम्मीद थी तुमसे          मगर तू

3 Jun

  दिल के झरोखे मे

स्याह  हो   गयी  रात   किधर   जायेगा  अक्स   मेरा  होगा  तू  जिधर   जायेगा  हिफ़ाजतन  रखा  है  दिल के झरोखे मे देखकर  मुझको  फिर  तू सवर जायेगा    मिरे  आगोश  से निकलकर

31 May

 नेता चुनना सिखलाना

जैसे मैना अपने बच्चों को, कुडा -कचड़ा में बिखरा हुआ दाना चुगना सिखलाती है। तुम वैसे ही अपने बच्चों को   नेता चुनना सिखलाना   बिखरे पुष्ट दानों को देखते ही

5 Feb

क्या हो तुम

दुनिया के आगे  इक योद्धा बनकर  खड़े रहते हो तुम  मगर भीतर से  सुकोमल बच्चे  जैसे हो तुम…   ग़म सारे अपने  भीतर छुपाए  रखते हो तुम  मगर सभी से 

5 Feb

क्या हो तुम

दुनिया के आगे  इक योद्धा बनकर  खड़े रहते हो तुम  मगर भीतर से  सुकोमल बच्चे  जैसे हो तुम…   ग़म सारे अपने  भीतर छुपाए  रखते हो तुम  मगर सभी से