क्या पौधे का हरा होना ही सफल उत्पादन की गारंटी है
खेत में खड़ी फसल का गहरा हरा रंग किसान के लिए सामान्यतः अच्छे स्वास्थ्य और अच्छी उपज का संकेत माना जाता है। लेकिन केवल पत्तियों का हरा होना सफल उत्पादन
खेत में खड़ी फसल का गहरा हरा रंग किसान के लिए सामान्यतः अच्छे स्वास्थ्य और अच्छी उपज का संकेत माना जाता है। लेकिन केवल पत्तियों का हरा होना सफल उत्पादन
कृषि विज्ञान केंद्र, मल्हना, देवरिया में कृषि विभाग के तत्वावधान में एफपीओ के लिए व्यवसाय योजना तैयार करने विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले
भाटपाररानी – कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना, महुआबारी, देवरिया के सभागार में अंकित अनुसूचित समाज सेवा कल्याण समिति के तत्वावधान में कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं आय सृजन विषय पर
भाटपाररानी -कृषि विज्ञान केंद्र , मल्हना के प्रक्षेत्रों में सुरक्षा, पारदर्शिता तथा कृषि कार्यों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आईसीएआर – अटारी जोन 3, कानपुर द्वारा जिले के
खरीफ फसलों में धान की खेती का प्रथम स्थान है| (जुलाई) का महीना धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान 21-25 दिन की स्वस्थ पौध
” केले का पौधा केवल फल देने वाला पौधा नहीं, बल्कि आय के अनेक स्रोतों का आधार है। फल, फूल, पत्तियाँ, तना, रेशा, जैविक खाद, मूल्य संवर्धन और अंतरवर्तीय फसलें,
देश का किसान आज भी तपती धूप, अनिश्चित मौसम और बढ़ती लागत के बीच अपनी मेहनत से अन्न पैदा करता है। खेत से मंडी तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें केवल
भारतीय कृषि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ ज्ञान केवल कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों या कृषि विज्ञान केन्द्रों तक सीमित नहीं है। खेतों में काम करने वाला किसान
आजकल बड़ी संख्या में युवा, नौकरीपेशा लोग, व्यवसायी और शहरों में रहने वाले परिवार खेती, प्राकृतिक खेती, बागवानी, डेयरी, फार्म स्टे और कृषि आधारित उद्यमों की ओर आकर्षित हो रहे
भारतीय कृषि की असली धूरी मानसून है, और मानसून की चाल अब पहले जैसी भरोसेमंद नहीं रही। खेत में खड़े किसान के लिए “सूखा” केवल गर्मी का मौसम नहीं होता,
भारतीय कृषि की असली धूरी मानसून है, और मानसून की चाल अब पहले जैसी भरोसेमंद नहीं रही। खेत में खड़े किसान के लिए “सूखा” केवल गर्मी का मौसम नहीं होता,