Wednesday 20th of October 2021 04:54:20 PM

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Category: कविता

2 Oct

सत्य और अहिंसा

सच कहता हूं  देश  शर्मसार  होता है महक फूलों में नहीं,भ्रमर आज रोता है बापू , माली नहीं  बाग जो  संवार सके हर इंसान केवल फर्ज अपना ढोता है लेकर

18 Sep

किराये का परिधान

यह शरीर किराये का परिधान है  किराया जिसका सत्कर्म प्रधान है  मदद दीन- दुखियों की करते रहो दुःख दर्द तुम उनका हरते रहो वही तो परलोक में पहचान हैं  यह

14 Sep

हिंदी

हिंदी प्रतिबिंब आज                शीष्टता सजीवता की, भाषाओं की ताज            दीप्तिमान आज हिंदी है खेत खलिहान, सीमा    

12 Sep

हिंदी

रो कर हिंदी कह रही, मत लो मेरा नाम आदर इंग्लिश पा रही, मैं होती बदनाम   जहाँ राष्ट्र भाषा नहीं, गूंगा है वह देश हिंदी भाषी क्या करें, मन

10 Sep

हिंदी

हर इक हिन्दोस्तानी के हृदय में है पली हिंदी सुनी भाषा अनेकों पर लगी सबसे भली हिंदी    हज़ारों काम जब होने लगे हिंदी में संपादित, विदेशी भूमि पर पथ

9 Sep

अमृत का प्याला

ब्रह्म की राहों में, ऋषियों की कहानी है धरती कुछ भी नहीं, मिट जाती निशानी है धरती पर आना है, आकर फिर जाना है जाने से पहले, करतब कुछ दिखलाना

5 Sep

शिक्षक दिवस

भगवान से भी अधिक है स्थान गुरु का माता- पिता से अधिक है सम्मान गुरु का अंधकार से निकाल कर जो रोशनी दिया सूरज- चांद से भी अधिक है पहचान

30 Aug

गोकुल के श्याम

कब से आंखे तरस रहीं हैं दर्शन तेरा हो जाए माला फूल चढ़ाने को आतुर मेरा मन हर्षाए झूला ढंका हुआ उस पर हीरे, मोती, सोने- चांदी मोर मुकुट धारण

29 Aug

जिंदगी

बेदर्द जमाने की निगाहों में जिंदगी की टेढ़ी- मेढ़ी राहों में खामोश यूं ही चलते रहना है अंगारों को फूल नहीं समझना है   ना किसी को जलाना है और

24 Aug

खत लिखते है तुझे

तुम जो आए जीवन में तेवर मेरे बदल गए जो दुनिया की भीड़ में कभी खोयी रहती, मै उससे बाहर निकल के खत लिखते हैं तुझे हां ये जमाना है

24 Aug

खत लिखते है तुझे

तुम जो आए जीवन में तेवर मेरे बदल गए जो दुनिया की भीड़ में कभी खोयी रहती, मै उससे बाहर निकल के खत लिखते हैं तुझे हां ये जमाना है