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Category: कविता

31 Oct

अहंकार

अहंकार को छोड़ो तुम     खुद के भीतर झांको भूले से भी कभी नहीं      कमतर किसी को आंको ।   चार दिनों का जीवन है    

26 May

” वट सावित्री”

देखो आज आया तीज का त्योहार  मन में छाई है आज खुशियां अपार ।  मेरे सजना की उमर लम्बी हो मेरा सजना स्वाबलम्बी हो शिव-शक्ति से यही करती हूं दुआ

14 Mar

रंगरेज़ ज़िंदगी

कभी कोई गुलाल-सा उड़ता हवा में घुलकर गुम हो जाता कोई अबीर-सा झरता हथेलियों पर मन की रेखाओं में भर जाता।   कुछ लोग पानी के रंगों जैसे होते हैं

26 Jan

मेरा वतन

सुनो वतन के कुछ गद्दारों दुर्दिन तेरा आएगा जब भी अपने छोड़ वतन तू दुश्मन से मिल जाएगा ।   अपने वतन से कर गद्दारी चैन कहां तू पाएगा जो

26 Jan

मेरा वतन

सुनो वतन के कुछ गद्दारों दुर्दिन तेरा आएगा जब भी अपने छोड़ वतन तू दुश्मन से मिल जाएगा ।   अपने वतन से कर गद्दारी चैन कहां तू पाएगा जो