जन्मदिन मुबारक
आज मेरे जीवन का, सबसे बड़ा त्योहार है, तेरा जन्मदिन मेरे लिए रब का दिया उपहार है । जिस दिन तूने पहली बार,मेरी गोद में आंखे खोली थी, मेरी
आज मेरे जीवन का, सबसे बड़ा त्योहार है, तेरा जन्मदिन मेरे लिए रब का दिया उपहार है । जिस दिन तूने पहली बार,मेरी गोद में आंखे खोली थी, मेरी
राधा प्रेम की साधना, राधा प्रेम का सार, राधा चरणों में मिले, जीवन को उद्धार । राधा नाम पुकारते, खिल उठते हैं धाम, राधा के बिन श्याम भी, हो
स्त्रियाँ कुछ भी जाया नहीं करती सहेजती हैं ,सजाती हैं संभालती हैं , सिलती हैं फटे कपड़े, जोड़ती हैं टूटे गमले, ढाँकती है मायूसी को अपनी मुस्कुराहट में । छिपाती
ना रेशम की कीमत पूछो ना राखी का मोल लगाना, ‘राखी’ जन्मों के रिश्ते हैं इन्हें प्रेम से सदा निभाना । राखी केवल धागा नहीं यह भावों का अभिनंदन
शेष रहा अपना कोई अनुबंध नहीं है। जाओ अब तुम पर कोई प्रतिबंध नहीं है।। एक भ्रमर के जैसे था तुममें जो विचलन, बांध नहीं पाया वह ही तुमसे
आज़ादी, कोई झंडा नहीं है जो पंद्रह अगस्त की सुबह हवा में कुछ देर लहराकर शाम को तह करके रख दी जाए। आज़ादी तो वह छोटी-सी रोशनी है जो
ई-दल, जो कि देवी पाटन मंदिर, तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में दलनायक राजू भास्कर के हमराह ड्यूटी संपादित कर रही है, दिनांक 19.04.2026 को मंदिर परिसर स्थित सूर्यकुंड पर ड्यूटी के
फागुन का देखो मास है आया सबके हृदय में उमंग है छाया , पुए पकवान की ढेर लगी है हर घर थाल में गुजिया सजी है। रंग-गुलाल हरा- नीला-
बहुरुपियों के चाल से खुद को रखिये संभाल, वरना एक दिन आएगा आप हो जाएंगे बेहाल । खुद के भीतर झांके नहीं औरों को दे
अहंकार को छोड़ो तुम खुद के भीतर झांको भूले से भी कभी नहीं कमतर किसी को आंको । चार दिनों का जीवन है
अहंकार को छोड़ो तुम खुद के भीतर झांको भूले से भी कभी नहीं कमतर किसी को आंको । चार दिनों का जीवन है