Saturday 28th of May 2022 07:24:23 AM

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Category: कविता

8 May

माँ

इस धरा पर ईश्वर को किसने देखा है मगर यह सत्य है खुदा सबके संग है हर इंसान के लिए मां के रूप में है। कठिनाइयों से लड़ना मां हमे,

14 Apr

संविधान

ऐसा संविधान भारत का दुनियां करती  है गुणगान मानवता हो पूज्य  धरा पर राष्ट्र धर्म  हो ऊपर जाति- पांति का भेद नहीं पर सेवा  सबसे बढ़कर समाज का हर प्राणी

5 Feb

वसंत ऋतु

ऋतुवन के राजा बसंत बाटे आइल  पीयर पीयर सरसो के फूल बा फुलाइल   बड़ बूढ़ लइकन के जोश लागल जागे पीछे कलियन के भौरा लागल भागे   मटर के

22 Jan

जय हिंद

उत्कल के उगते सूरज का,                 बंगाल  में किरणें आई किलकारी गूंजी  आंगन में,                 परिवार

15 Jan

खिचड़ी दोहावली

मकर राशि के गेह में, रवि ने किया प्रवेश     बहुत याद आया हमें, अपना गाँव प्रदेश   गन्ने से बनते हुए, गुड़ की सोंधी गन्ध      और

13 Jan

बेटियाँ

घर का स्वाभिमान होती है बेटियाँ पिता का गुमान होती है बेटियाँ जिस घर में जन्म वही छोड जाती बेटो से ज्यादा धैर्यवान होती है बेटियाँ घर की लक्ष्मी होती

10 Jan

माही मेरा

    तुझे देखके बदला नज़ारा अब तू ही मेरा सहारा की सुध बुध भुल गया में।   माही मेरा सबसे है प्यारा हर अदा पे हैं जीवन वारा की

1 Jan

नया वर्ष

नया वर्ष हो मंगलमय आप सबका मधुमय पवन में चमन झूमता है यशगान का परचम लहरे हमेशा आज पाताल धरती गगन झूमता है खुशियों से पूरा चमन झूमता है सुरभित

31 Dec

आवत – विगत वर्ष

साल पुरान बिदा करके अब नूतन रूप लिए फिर आया नाचत गावत स्वागत में हमने खुशियाँ हर साल मनाया लेकिन रोवत गावत साल बितावत नैनन पोछ न पाया मूर्ख बने

28 Dec

तुम आ जाते

ये उदास लम्हे मेरे फिर से खिल जाते दिन जो ,वर्ष के समान बीत रहे हैं यू नही बीतते कटते अगर तुम आ जाते। ठंडी की ये शामे याद तुम्हारी

28 Dec

तुम आ जाते

ये उदास लम्हे मेरे फिर से खिल जाते दिन जो ,वर्ष के समान बीत रहे हैं यू नही बीतते कटते अगर तुम आ जाते। ठंडी की ये शामे याद तुम्हारी