पूर्वांचल मे मशरूम उत्पादन की अपार सम्भावना- प्रो.रवि प्रकाश
बलिया / सोहाव – मशरूम को कुकुरमुत्ता, भूमिकवक, खुम्भ, खुम्भी आदि कई नामों से जाना जाता है।, प्रायः बरसात के दिनों में छतरीनुमा संरचनायें सडे़ -गले कूडे़ के ढेरों पर
बलिया / सोहाव – मशरूम को कुकुरमुत्ता, भूमिकवक, खुम्भ, खुम्भी आदि कई नामों से जाना जाता है।, प्रायः बरसात के दिनों में छतरीनुमा संरचनायें सडे़ -गले कूडे़ के ढेरों पर
बलिया / सोहाव – सहजन अपने विविध गुणों, तथा असानी से उग आने के लिए जाना जाता है। सहजन का पत्ता, फल और फूल सभी पोषक तत्वों से भरपूर हैं
बलिया – आम की खेती का लाभ मुख्य रूप से समय पर बाग में किये जाने वाले विभिन्न कृषि कार्यो पर निर्भर करता है। समय से कृषि कार्य या गतिविधियाँ
देवरिया – किसानो की आय दोगुनी करने की दिशा में किसानो को जानकारी देते हुए उद्यान विशेषज्ञ एवं प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र, मल्हना, देवरिया रजनीश श्रीवास्तव ने बताया की औद्यानिक
बलिया / सोहाव – खरीफ फसलों में धान की प्रमुख रूप से खेती की जाती है ।किसान भाइयों को धान की फसल से बहुत उमीद रहती है। इस लिए धान
बलिया / सोहाव – लघु या छोटे धान्य फसलों जैसे -मंडुआ, सावाँ,कोदों, चीना,काकुन आदि को मोटा अनाज कहा जाता है। इन सभी फसलों के दानों का आकार बहुत छोटा होता
बलिया/सोहाव – टिड्डी दल जनपद गाजीपुर से होते हुए बलिया जनपद मे प्रवेश कर चुका है। फिलहाल उजियार घाट के आस पास चार किमी लक्ष्मणपुर ,नरही चितबढा के आस पास
बलिया/ सोहाव – पौधे से बाली निकलने के समय धान पर कंडुआ रोग का असर बढने लगता है। इस रोग के कारण धान के उत्पादन पर असर पड़ने
बलिया / सोहाव – खरीफ फसलों में धान की प्रमुख रूप से खेती की जाती है ।किसान भाइयों को धान की फसल से बहुत उमीद रहती है। इस लिए
धान की रोपाई मे काफी लागत एवं श्रमिको की कमी के कारण किसानों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं तथा लाभ कम ले पाते हैं ।लागत कम करने हेतु
धान की रोपाई मे काफी लागत एवं श्रमिको की कमी के कारण किसानों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं तथा लाभ कम ले पाते हैं ।लागत कम करने हेतु