अरहर की उन्नत खेती
प्रजातियाँ – कम अवधि वाली (125-140 दिन) % ]पूसा 84, मानक, पूसा 992, इत्यादि लम्बी अवधि वाली (240-275) बहार, मालवीय अरहर-१३, नरेन्द्र अरहर 1, नरेन्द्र अरहर २, आई पी
प्रजातियाँ – कम अवधि वाली (125-140 दिन) % ]पूसा 84, मानक, पूसा 992, इत्यादि लम्बी अवधि वाली (240-275) बहार, मालवीय अरहर-१३, नरेन्द्र अरहर 1, नरेन्द्र अरहर २, आई पी
बलिया / सोहाव – जो भी फल, सब्जियां या अनाज खाते हैं उसमें परागण की प्रक्रिया का खास योगदान मधुमक्खियों का है। मधुमक्खियां पेड़ पौधों के पराग कणों को एक
कृषि के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नित्य नवीन कृषि प्रणालियो का आविष्कार हो रहा है | फर्टिगेशन भी एक ऐसी ही तकनीकि है ,जिसमे पौधों की
बलिया – इस समय कद्दू वर्गीय सब्जियों में फल मक्खियों की समस्या काफी बढ़ जाती है, इस कीट का प्रकोप सर्वाधिक मार्च से सितंबर महीने तक रहता है। इस दौरान
बलिया – प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 300 ग्राम सव्जियो की आवश्यकता होती है।जिसमे 100 ग्राम पत्तेदार होनी चाहिये। आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौधौगिक विश्व विधालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित
बलिया – खाध पदार्थों को हाँनि पहुंचाने वाले जीवों में चूहों का प्रथम स्थान है ।एक चूहा एक दिन में 10-60 ग्राम तक अनाज खा सकता है।चूहों की संख्या मनुष्य
बलिया – पूर्वांचल में बार -बार बारिश होने से नुकसान ही नुकसान हो रहा है। जितना जल्दी हो सके फसलों की कटाई मड़ाई कर घरो में अनाजों का भण्डारण सुखाकर
अनाज हो ,फल हो या सब्जी, अच्छीे पैदावार के लिए इनमें कीटनाशकों का जो प्रयोग हो रहा है, उससे मानव सेहत को गंभीर खतरा है। कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां ज्यादा
बलिया – पेड़ी, बसन्तकालीन एवं शरदकालीन गन्ने की फसल खेतों में लगी हुई है। गन्ने की फसल में इस समय कई तरह के कीट लगने का खतरा रहता है जो
बलिया – इस समय भिंडी की फसल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ।गर्मी के कारण तथा मौसम बदलने के कारण विभिन्न कीट एवं बीमारियों का प्रकोप हो सकता
बलिया – इस समय भिंडी की फसल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ।गर्मी के कारण तथा मौसम बदलने के कारण विभिन्न कीट एवं बीमारियों का प्रकोप हो सकता