धान की रोपाई के समय रखें ध्यान -प्रो. रवि प्रकाश
बलिया / सोहाव – खरीफ फसलों में धान की प्रमुख रूप से खेती की जाती है ।किसान भाइयों को धान की फसल से बहुत उमीद रहती है। इस लिए धान
बलिया / सोहाव – खरीफ फसलों में धान की प्रमुख रूप से खेती की जाती है ।किसान भाइयों को धान की फसल से बहुत उमीद रहती है। इस लिए धान
बलिया / सोहाव – लघु या छोटे धान्य फसलों जैसे -मंडुआ, सावाँ,कोदों, चीना,काकुन आदि को मोटा अनाज कहा जाता है। इन सभी फसलों के दानों का आकार बहुत छोटा होता
बलिया/सोहाव – टिड्डी दल जनपद गाजीपुर से होते हुए बलिया जनपद मे प्रवेश कर चुका है। फिलहाल उजियार घाट के आस पास चार किमी लक्ष्मणपुर ,नरही चितबढा के आस पास
बलिया/ सोहाव – पौधे से बाली निकलने के समय धान पर कंडुआ रोग का असर बढने लगता है। इस रोग के कारण धान के उत्पादन पर असर पड़ने
बलिया / सोहाव – खरीफ फसलों में धान की प्रमुख रूप से खेती की जाती है ।किसान भाइयों को धान की फसल से बहुत उमीद रहती है। इस लिए
धान की रोपाई मे काफी लागत एवं श्रमिको की कमी के कारण किसानों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं तथा लाभ कम ले पाते हैं ।लागत कम करने हेतु
बलिया /सोहाव – तिल का उपयोग रेवडी , लडड् बनाने के साथ-साथ अन्य विभिन्न रूप मे बिशेष रूप से किया जाता है। इसके तेल का उपयोग पूजा पाठ, शरीर
देवरिया – अधिक आय के लिए जिमीकंद, सूरन या ओल की खेती नकदी फसल के रूप में महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, पश्चिम बंगाल एवं उत्तर प्रदेश में बहुतायत से की जाती
देवरिया ( कृषि विज्ञान केंद्र )– अदरक एक महत्वपूर्ण मसाले वाली नकदी फसल है जिसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में घरेलू उपयोग हेतु तथा व्यापारिक स्तर पर
पपीता सबसे कम समय में फल देने वाला पेड़ है इसलिए कोई भी इसे लगाना पसंद करता है| पपीता न केवल सरलता से उगाया जाने वाला फल है, बल्कि जल्दी
पपीता सबसे कम समय में फल देने वाला पेड़ है इसलिए कोई भी इसे लगाना पसंद करता है| पपीता न केवल सरलता से उगाया जाने वाला फल है, बल्कि जल्दी