बुद्ध पूर्णिमा के दिन रथ यात्रा निकाली जायेगी- डॉ नंदरतन थेरो
कुशीनगर – त्रिविध पावनी ” बैशाख पूर्णिमा के दिन तीन घटनाएँ घटी बुद्ध जी का जन्म , ज्ञान और निर्वाण | 2567 बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 5 मई 2023
कुशीनगर – त्रिविध पावनी ” बैशाख पूर्णिमा के दिन तीन घटनाएँ घटी बुद्ध जी का जन्म , ज्ञान और निर्वाण | 2567 बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 5 मई 2023
सुल्तानपुर- शासन के निर्देश पर डॉ लवकुश द्विवेदी निदेशक अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग द्वारा जनपद के बिजेथुआ महाबीरन सूरापुर में आकाशवाणी और दूरदर्शन की सुप्रसिद्ध लोक गायिका कुसुम वर्मा
हिन्दू पंचांग के अनुसार हर एक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा साधना व आराधना की जाती है , लेकिन फागुन माह
वज्र कठोर , कुसुम कोरक ,पिनाक पान्ये नमो नमस्ते विश्व विजम सप्घ्म , नमो शिवाय शम्मुपते शिव सत चित आनन्द परमानंद है | शिव सृष्टि का प्राण केंद्र है |इनके
माघी पूर्णिमा दुनिया भर के थेरवाद बौद्ध माघ पूजा दिवस के रूप मनाते हैं, जो कई संस्कृतियों और मान्यताओं में फैले सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध त्योहारों में से एक है। परंपरा
नव नालन्दा महाविहार आवासीय परिसर में सरस्वती-अर्चन एवं वसंत पंचमी का आयोजन किया गया। मुख्य यजमान की भूमिका में डॉ. प्रदीप कुमार दास थे। संयोजन सुबोध कुमार का था ।मंत्रोच्चार
लखनऊ- प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शनिवार को मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आस्था का रेला उमड़ पड़ा। तकरीबन दो करोड़ लोगों के पवित्र संगम में
बौद्ध धम्म ध्वज मात्र पाँच रंगों का एक पताका मात्र नहीं है। बल्कि यह सम्पूर्ण जगत में जीव मात्र के कल्याणार्थ फहरता एक प्रतीक है। इसके अतिरेक ध्वज का प्रयोग
सांता क्लॉज का असली साता का नाम संत निकोलस है। इनका जन्म जीसस क्राइस्ट के मृत्यु के करीब 280 साल पश्चात् एक धनी परिवार में हुआ था। इनके बचपन में ही
नव नालन्दा महाविहार द्वारा जेठियन से राजगीर तक पूर्व वर्षों की भाँति ‘धम्म-यात्रा’ आयोजित की गई । यह ऐतिहासिक ‘धम्म-यात्रा’ जेठियन से यात्रा शुरू हुई और इसकी समाप्ति वेणुवन, राजगीर
नव नालन्दा महाविहार द्वारा जेठियन से राजगीर तक पूर्व वर्षों की भाँति ‘धम्म-यात्रा’ आयोजित की गई । यह ऐतिहासिक ‘धम्म-यात्रा’ जेठियन से यात्रा शुरू हुई और इसकी समाप्ति वेणुवन, राजगीर