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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 18 Feb 2023 7:20 PM |   681 views

देवों के देव ” महादेव

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर एक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा साधना व आराधना की जाती है , लेकिन फागुन माह की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है |इस दिन शिव भक्त देवालयों में जाकर शिव लिंग का विशेष रूप में जलाभिषेक कर दूध , बेलपत्र , धतूरा ,भांग आदि चढातें हैं |

ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव जी व माता पार्वती का विवाह हुआ था |इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग के उदय से हुआ था | सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्य रात्रि भगवान् शंकर का ब्रह्मा से रूद्र के रूप में अवतरण हुआ था | प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्माण्ड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समस्त नकारात्मक तत्वों को विनष्ट कर देते हैं |

देवो के देव महादेव को आदि देव भी कहा जाता है | जो प्रेतों व पिशाचों से घिरें रहतें हैं ,श रीर पर मसानो की भस्म , गले में सर्पों की माला , कंठ में विष , जटाओं में जगत तारिणी गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला , बैलों की सवारी करने वाले शिव अमंगल कारी दिखने के बावजूद भी भक्तों के लिए अत्यंत मंगलकारी हैं और अपने भक्तों को श्री संपत्ति प्रदान करतें हैं |

महाशिवरात्रि सनातन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है | इस दिन शिव भक्त व्रत रखकर शिव का पूजन अर्चन करके अपने जीवन में सुख – समृधि की प्राप्ति करते हैं |औघड़दानी शिव की उपासना करने मात्र से धन – धान्य की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली समस्याओं से निजात मिल जाता है |

मुस्कुराते हुए शिव की मूर्ति को अत्यंत शुभ माना जाता है |घर की सुख -शान्ति व समृधि के निमित्त घर के उत्तर दिशा में शिव जी की मूर्ति लगाना श्रेयष्कर माना जाता है |नंदी पर सवार शिव जी शुभ माने जाते हैं |तुलसी जी के गमलों में शिव लिंग रखकर कदापि पूजन नही करना चाहिए |

महाशिवरात्रि का पर्व काम , क्रोध , लोभ का परित्याग कर सकारात्मक भाव से जीवन यापन करने का सन्देश देता है | करुणा के सागर भोले नाथ सर्व मंगलकारी विध्नहर्ता तथा अकाल मृत्यु रोग व शोक से मुक्ति देने वाले देवों  के देव “महादेव हैं |

— मनोज मैथिल   

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