डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती समारोह मनाया गया
नव नालन्दा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालन्दा में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर पाँचवाँ समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का विषय है – ‘
नव नालन्दा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालन्दा में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर पाँचवाँ समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का विषय है – ‘
भारत गणराज्य के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने नव नालंदा महाविहार की आधारशिला रखी थी । उनके जन्मदिन पर नव नालन्दा महाविहार द्वारा कल 03 दिसम्बर से पाँचवाँ दो
महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालन्दा एवं महाराजा वीर विक्रम विश्वविद्यालय, अगरतला, त्रिपुरा के संयुक्त तत्त्वावधान में पारस्परिक विनिमय के अन्तर्गत आयोजित किए जा रहे “अंतर्राज्यीय सम्बन्ध एवं भारतीय संस्कृति ” विषयक
लखनऊ:उत्तर प्रदेश विधान सभा के राजर्षि पुरूषोत्तम दास टण्डन हाल में आज पुस्तक गजल संग्रह ‘‘मुंतजिर निगाहों में‘‘ का विमोचन सभापति, विधान परिषद्, कुंवर मानवेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। गजल
15 दिवसीय हिंदी महोत्सव के अंतर्गत कल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) और हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के सौजन्य से व हिंदी सेवी विद्वान सुधाकर पाठक के
गोरखपुर -उ0प्र0 गौरव सम्मान-2022 हेतु उ0प्र0 के ख्यातिलब्ध महानुभावों जिन्होने विभिन्न विधाओं एवं कार्य क्षेत्रों में यथा- कला व संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, ललित कलायें, नाट्य
दिल्ली /रोहिणी – ” एक टुकड़ा धूप ” रश्मि सक्सेना द्वारा रचित काव्य संग्रह है , जो निराशा में आशा की किरण है | यह काव्य संग्रह जीवन को नई
भारत सरकार, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा सूरत में 14 सितंबर 2022 को आयोजित हिंदी दिवस समारोह के दौरान वर्ष 2021-22 के लिए राजभाषा कीर्ति पुरस्कार वितरित किए गए। समारोह
लखनऊ -डा. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के भौतिक विज्ञान विभाग में कार्यरत डा. धीरेन्द्र बहादुर सिंह को उनके उच्च विज्ञान लेखन हेतु हिंदी के विख्यात विद्वान की स्मृति
” नज़्म करते कोई नई दुनिया कि ये दुनिया हुई पुरानी भी ” सुकूत- ए शाम मिटाओ बहुत अँधेरा है सुखन की शम्-अ जलाओ बहुत अँधेरा है
” नज़्म करते कोई नई दुनिया कि ये दुनिया हुई पुरानी भी ” सुकूत- ए शाम मिटाओ बहुत अँधेरा है सुखन की शम्-अ जलाओ बहुत अँधेरा है