चना की फसल में फली छेदक कीट से रहे सावधान
चना की फसल में इस समय फूल फली बन रहा है। इस अवस्था में सबसे हानिकारक कीट फली छेदक का प्रकोप हो सकता है। प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया
चना की फसल में इस समय फूल फली बन रहा है। इस अवस्था में सबसे हानिकारक कीट फली छेदक का प्रकोप हो सकता है। प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया
भाटपाररानी -कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी) मल्हना, देवरिया में आर्या परियोजना के तहत मधुमक्खी पालन पर चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रतिभागियों को संबोधित
भारतीय कृषि आज केवल उत्पादन की चुनौती से नहीं जूझ रही, बल्कि उसे स्थायित्व, लाभ और सम्मान तीनों को एक साथ साधना है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव,
आज की कृषि केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती। बढ़ती जनसंख्या, घटती जोत, जल संकट, पोषण असुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार की आवश्यकता ने कृषि को नए
भारत के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में बंजर और क्षरित भूमि एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसी भूमि न केवल कृषि उत्पादन को सीमित करती है, बल्कि ग्रामीण आजीविका, रोजगार
सरसों की फसल इस समय प्रौढ़ा अवस्था में है। फूलों से भरा है। फूलों पर आकर्षित होते है माहूँ कीट। प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी देवरिया के निदेशक प्रो. रवि प्रकाश मौर्य
आम के बाग में सबसे अधिक ध्यान बौर लगते समय रखना चाहिए, इन्हीं एक-दो महीने में बाग की देख-रेख करके किसान अच्छा उत्पादन पा सकते हैं। फरवरी-मार्च के महीने में
वर्तमान माह जनवरी में ठंड अपना रंग दिखा रहा है। कहा जाता है माघ का ठूसारा । जनवरी के मौसम में रबी फसलों गेहूं, चना, सरसों के लिए ठंड अनुकूल
देवरिया- कृषि क्षेत्र में निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु उत्तर प्रदेश में कार्य क्षमता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय, भुजौली कॉलोनी, देवरिया परिसर में किया
कुशीनगर -आज कृषि विज्ञान केंद्र कुशीनगर द्वारा मंझरिया गांव में बीबीजी रामजी योजना जागरुकता हेतु किसान जागृति गोष्ठी का आयोजन किया गया | जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ.
कुशीनगर -आज कृषि विज्ञान केंद्र कुशीनगर द्वारा मंझरिया गांव में बीबीजी रामजी योजना जागरुकता हेतु किसान जागृति गोष्ठी का आयोजन किया गया | जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ.