मकर संक्रांति
सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है जो प्राकृति सूर्य उपासना और मानव जीवन के बीच संतुलन को प्रदर्शित करता है। यह त्यौहार भारत के भिन्न- भिन्न नामों
सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है जो प्राकृति सूर्य उपासना और मानव जीवन के बीच संतुलन को प्रदर्शित करता है। यह त्यौहार भारत के भिन्न- भिन्न नामों
लखनऊ: संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत संस्कृति निदेशालय के अधीन कार्यरत स्वायत्तशासी संस्थाओं द्वारा माघ मेला-2026 के पावन अवसर पर 03 से 30 जनवरी, 2026 तक प्रयागराज में भव्य
लखनऊ :उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग राजधानी लखनऊ में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से धार्मिक स्थलों के समग्र विकास पर तेजी से कार्य कर रहा है। इसी
गोरखपुर: इंडियन रेलवे केटरिंग एण्ड टूरिज्म कार्पाेरेशन लि0 (आईआरसीटीसी) द्वारा गोरखपुर रेलवे स्टेशन से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन द्वारा तिरुपति बालाजी मंदिर, रामनाथ स्वामी मंदिर (रामेश्वरम), मीनाक्षी मंदिर, कन्याकुमारी दर्शन,
कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कुशीनगर स्थित म्यांमार बौद्ध विहार पहुंचकर बौद्ध धर्मगुरु अग्गमहापंडित भदंत ज्ञानेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने भदंत ज्ञानेश्वर के पार्थिव शरीर पर पुष्प
सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार की 94वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखा गया। देश-विदेश से पहुंचे हजारों बौद्ध श्रद्धालुओं ने तथागत
छठ एक उज्ज्वल उत्सव है—एक ऐसा पर्व जिसमें जल, प्रकाश, वायु, धरती और सूर्य का अद्भुत संगम होता है। यह कोई धार्मिक कर्मकाण्ड भर नहीं बल्कि लोक की आत्मा का
सीकर (राजस्थान)। श्याम भक्तों के लिए अहम सूचना जारी करते हुए खाटू श्याम मंदिर कमेटी ने दर्शन समय को लेकर नई गाइडलाइन लागू की है। अब हर शनिवार को रात 10:00
स्वामी विवेकानंद और महर्षि महेश योगी दोनों अपने-अपने समय के महान चिंतक और आध्यात्मिक विचारक थे। उन्होंने भारतीय दर्शन, योग और आध्यात्मिकता को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। उनके विचारों
आध्यात्मिक दर्शन कैसा होना चाहिए? मनुष्य सर्वावस्था में सुख – शान्ति में रहना चाहता है।यह चाहत असीम है।अनन्त सुख का पिपासु है। अनन्त सुख ही आनंद है।” सुखम् अनन्तम् आनन्दम्
आध्यात्मिक दर्शन कैसा होना चाहिए? मनुष्य सर्वावस्था में सुख – शान्ति में रहना चाहता है।यह चाहत असीम है।अनन्त सुख का पिपासु है। अनन्त सुख ही आनंद है।” सुखम् अनन्तम् आनन्दम्