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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Jan 2026 6:50 PM |   297 views

मकर संक्रांति

सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है जो प्राकृति सूर्य उपासना और मानव जीवन के बीच संतुलन को प्रदर्शित करता है। यह त्यौहार भारत के भिन्न- भिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण तमिलनाडु में पोंगल तथा असम में महा बिहू के नाम से जाना जाता है। नाम चाहे अलग हो लेकिन इस पर्व का मूल भाव एक ही है और वह है सूर्य की उपासना और दान पुण्य करना।
 
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मनाया जाता है। यह वह पल होता है जब सूर्य उत्तरायण होते है और खरमास के बाद शुभ काल आरंभ होता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय आत्मशुद्धि ओर पुण्य अर्जन के लिए अत्यंत अच्छा माना जाता है।
 
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है। यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते है। उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस समय किए गए तप जप दान और पूजा का फल जल्दी ही प्राप्त होता है।
 
शास्त्रों में उल्लेखनीय है  कि मकर संक्रांति के दिन गंगा यमुना सरस्वती या किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्थान करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होता है। साथ ही ब्रह्मांडो साधुओं और दीन- दु:खी निर्धन जरूरतमंद लोगों को दान देने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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