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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Nov 2025 7:21 PM |   718 views

सारनाथ में मूलगंध कुटी विहार की 94वीं वर्षगांठ पर निकली भगवान बुद्ध की शोभायात्रा, हजारों बौद्ध अनुयायी हुए शामिल

सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार की 94वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखा गया। देश-विदेश से पहुंचे हजारों बौद्ध श्रद्धालुओं ने तथागत के पवित्र अस्थि अवशेषों के दर्शन किए। कल 5 नवंबर, 2025 कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार, श्रीलंका, भूटान, नेपाल और लाओस से आए बौद्ध श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
 
यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि सारनाथ में हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष दर्शन के लिए रखे जाते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु एवं तीर्थयात्री सम्मिलित होते हैं।
 
इस वर्ष तीन दिवसीय (03 से 05 नवंबर) आयोजन में पिछले वर्ष से करीब दोगुना श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले देशों के अलावा कोलकाता, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सारनाथ पहुंचे। यह आयोजन महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया, सारनाथ केंद्र और वियतनामी बौद्ध संघ के सहयोग से आयोजित किया गया।
 
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सारनाथ में कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। विशेष शोभा यात्रा और पूजा-अर्चना के बीच देश-विदेश से आए 22,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के पावन अस्थि अवशेषों के दिव्य दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। विदेशी श्रद्धालुओं में श्रीलंका और वियतनाम से सबसे अधिक आगंतुकों ने सहभाग किया। उन्होंने बताया, कि सारनाथ वही पुण्य भूमि है जहां भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश धर्मचक्र प्रवर्तन दिया था।
 
जयवीर सिंह ने बताया कि भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष के भारत वापसी ने बौद्ध श्रद्धालुओं में नई आस्था और उत्साह का संचार किया है। सारनाथ में महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रधान भिक्षु भंते सुमिथानंद थेरो ने इसे अत्यंत हर्ष और आध्यात्मिक गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से 127 साल बाद यह संभव हुआ। इस ऐतिहासिक वापसी के स्वागत में इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु सारनाथ पहुंचे और पवित्र अवशेषों के दर्शन कर स्वयं को धन्य पाया।
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