Sunday 18th of January 2026 08:32:19 AM

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Category: कविता

7 Jan

“बहु रुपिया”

बहुरुपियों के चाल से   खुद को रखिये संभाल, वरना एक दिन आएगा    आप हो जाएंगे बेहाल ।   खुद के भीतर झांके नहीं     औरों को दे

31 Oct

अहंकार

अहंकार को छोड़ो तुम     खुद के भीतर झांको भूले से भी कभी नहीं      कमतर किसी को आंको ।   चार दिनों का जीवन है    

26 May

” वट सावित्री”

देखो आज आया तीज का त्योहार  मन में छाई है आज खुशियां अपार ।  मेरे सजना की उमर लम्बी हो मेरा सजना स्वाबलम्बी हो शिव-शक्ति से यही करती हूं दुआ

14 Mar

रंगरेज़ ज़िंदगी

कभी कोई गुलाल-सा उड़ता हवा में घुलकर गुम हो जाता कोई अबीर-सा झरता हथेलियों पर मन की रेखाओं में भर जाता।   कुछ लोग पानी के रंगों जैसे होते हैं