डॉ0 संजुला सिंह “संजू” “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से नवाजी गईं
जमशेदपुर (झारखंड ) शहर की निवासी डॉo संजुला सिंह “संजू” जी को “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन” नेपाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी के अवसर पर उन्हें साहित्य के
जमशेदपुर (झारखंड ) शहर की निवासी डॉo संजुला सिंह “संजू” जी को “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन” नेपाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी के अवसर पर उन्हें साहित्य के
आजु अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पऽ हम चर्चा करत बानी २०२६ में आचार्य शुभ नारायण सिंह ‘शुभ’ कऽ ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास ‘ शिवालिक प्रकाशन, दिल्ली से आइल बा। ई
नव नालंदा महाविहार ,नालंदा ( संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ) के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित ‘बौद्ध संस्कृति संवर्धन पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की
नालंदा-भोजपुरी कला और संस्कृति पर केंद्रित वंदना श्रीवास्तव की आलोचनात्मक पुस्तक “भोजपुरी कला के बहाने” का लोकार्पण नव नालंदा महाविहार (सम विश्वविद्यालय, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), नालंदा में विश्व हिंदी
ई. एफ. एस. एल. ई. संस्था के तत्त्वावधान में लखनऊ स्थित नेशनल पीजी कॉलेज में एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे समकालीन
गोरखपुर। भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया “भाई” के तत्वावधान में स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर, आर्य नगर में आयोजित एक दिवसीय भोजपुरी संगोष्ठी मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई । संगोष्ठी की
गोरखपुर -प्रख्यात लोकगायिका स्मृति शेष मैनावती देवी की स्मृति में दिए जाने वाला “मैनावती देवी लोक गायिका राष्ट्रीय सम्मान 2025” इस वर्ष मारिसस की लोकगायिका वर्षारानी बिशेसर को दिया जाएगा
नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में 15–16 दिसंबर , 2025 को “सानिध्य” (एक सांस्कृतिक सोसाइटी) – गुरुकुल फ़ॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स अपने 25 वर्षों के गौरवशाली सांस्कृतिक सफ़र का रजत
नालंदा की धरती पर खड़ा होकर अगर समय को सुना जाए तो वह केवल इतिहास नहीं, एक सतत धड़कन की तरह महसूस होता है | जैसे इस मिट्टी के नीचे
बनारस -भोजपुरी अध्ययन केन्द्र, कला संकाय,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा ‘भोजपुरी लोकगीत और चित्रकला : पाठ, गायन और चित्रकला’ अंतर-विषयक सप्तदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवे दिन गोरखपुर से आए प्रख्यात लोक गायक
बनारस -भोजपुरी अध्ययन केन्द्र, कला संकाय,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा ‘भोजपुरी लोकगीत और चित्रकला : पाठ, गायन और चित्रकला’ अंतर-विषयक सप्तदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवे दिन गोरखपुर से आए प्रख्यात लोक गायक