Friday 7th of August 2026 04:12:21 AM

Breaking News
  • उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों में 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मिलेगी निःशुल्क यात्रा सुविधा |
  • उत्तर प्रदेश के 13 आईएस का स्थानान्तरण|
  • असम में बाढ़ राहत तेज |
  • गाजियाबाद में 12 अगस्त तक स्कूल बंद |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 14 Dec 2025 7:06 PM |   361 views

सानिध्य” गुरुकुल का रजत जयंती उत्सव त्रिवेणी कला संगम, दिल्ली में आयोजित होगा

नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में 15–16 दिसंबर , 2025 को “सानिध्य” (एक सांस्कृतिक सोसाइटी) – गुरुकुल फ़ॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स अपने 25 वर्षों के गौरवशाली सांस्कृतिक सफ़र का रजत जयंती उत्सव भव्य रूप से आयोजित करेगा। भारतीय शास्त्रीय कला के संरक्षण, संवर्धन और गुरु–शिष्य परंपरा को समर्पित यह दो दिवसीय आयोजन संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के विविध रंग प्रस्तुत करेगा।
 
उत्सव का शुभारंभ 15 दिसंबर को होगा, जिसमें दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके साथ सीसीआरटी (भारत सरकार) के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार इंदुरकर सहित अनेक विशिष्ट अतिथि समारोह की गरिमा बढ़ाएँगे। 16 दिसंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय प्रचारक गुरु सूर्यकांत केलकर मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करेंगे।
 
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्र को समर्पित प्रस्तुतियों से की जाएगी। “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संस्था की छात्राएँ कथक नृत्य के माध्यम से भावपूर्ण प्रस्तुति देंगी। इसके पश्चात भारतीय शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की सशक्त प्रस्तुतियाँ होंगी। कथक नृत्य की विशिष्ट प्रस्तुतियों में पद्मश्री नलिनी–कमलिनी अस्थाना, शिखा खरे तथा नेपाल की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना सुबीमा श्रेष्ठ की प्रस्तुतियाँ दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करेंगी।
 
उत्सव में सानिध्य गुरुकुल, दिल्ली एवं नोएडा के बाल, युवा और वरिष्ठ शिष्य एकल, युगल एवं सामूहिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कलात्मक दक्षता का परिचय देंगे।
 
इस अवसर पर “Kathak 2.0 – Tradition, Technique and Aesthetics in the Era of AI” तथा “Fashioning Masculinity in Dance” पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
 
संस्था की निदेशक शिखा खरे के अनुसार, यह रजत जयंती उत्सव न केवल सानिध्य गुरुकुल की 25 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करेगा, बल्कि आने वाले समय में भारतीय शास्त्रीय कला की दिशा और दृष्टि को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।
 
 
 
Facebook Comments