असफलता के भय से कैसे उबरें?
असफलता का भय लोगों को परेशान क्यों कर देता है? मैं अक्सर इस प्रश्न पर विचार करती हूँ। भय हमें इसलिए निष्क्रिय नहीं करता कि असफलता हमारे प्रयासों को निरर्थक
असफलता का भय लोगों को परेशान क्यों कर देता है? मैं अक्सर इस प्रश्न पर विचार करती हूँ। भय हमें इसलिए निष्क्रिय नहीं करता कि असफलता हमारे प्रयासों को निरर्थक
भारत के दिल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी में इंटर्नशिप के दौरान एक दिन एक विद्यार्थी ने बड़े आश्चर्य के साथ मुझसे पूछा—इतनी सारी किताबों
— परिचय दास प्रोफेसर, नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय, नालंदा ____________________________________ जयंती किसी व्यक्ति की नहीं, एक चेतना की होती है। वह तिथि नहीं, एक आवर्तन होती है—जिसमें समय
खेती केवल फसल उगाने का काम नहीं है, यह किसान की पूरी ज़िंदगी, उसकी पूँजी, उसका समय और उसका भरोसा होती है। एक किसान जब कोई नया प्रयोग करता है,
————- रवींद्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास”प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष , हिंदी विभाग, नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय ( संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ) , नालंदा |
दीपावली का त्योहार केवल प्रकाश का उत्सव नहीं है; यह हमारी संस्कृति, हमारी स्मृतियों और हमारी आस्थाओं का प्रतिबिंब है। अंधकार से उभरता यह प्रकाश हमें याद दिलाता है कि
के पी शर्मा ( खड्ग प्रसाद शर्मा ) ओली का इस्तीफा केवल राजनीतिक घटना नहीं बल्कि नेपाल के वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक परिदृश्य का भी सूचक है।
मनुष्य एक यौथ जीवी है। अपने को सुरक्षित रखने के लिए तथा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक दूसरे की तलाश किया। अपने साथी की खोज किया क्योंकि वह
भोजपुरी भाषा का उद्भव मागधी प्राकृत से माना जाता है, जो प्राचीन भारत की प्रमुख भाषाओं में से एक थी। मागधी प्राकृत, जिसे पाली के नाम से भी जाना जाता
समकालीन पत्रकारिता के परिदृश्य में जब सूचनाएँ आँधी की गति से आती हैं और तथ्यों का मूल्यांकन भावनात्मक उत्तेजना के धुँधलकों में खो जाता है, तब एक ऐसा मंच—जो न
समकालीन पत्रकारिता के परिदृश्य में जब सूचनाएँ आँधी की गति से आती हैं और तथ्यों का मूल्यांकन भावनात्मक उत्तेजना के धुँधलकों में खो जाता है, तब एक ऐसा मंच—जो न