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Category: स्तंभ

12 Jan

स्वामी विवेकानंद एवं महर्षि महेश योगी – भारतीय आध्यात्म की आधुनिक पुनर्व्याख्या

  — परिचय दास    प्रोफेसर, नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय, नालंदा  ____________________________________ जयंती किसी व्यक्ति की नहीं, एक चेतना की होती है। वह तिथि नहीं, एक आवर्तन होती है—जिसमें समय

5 Jan

कैसे बचें, हवाई वादों की लखपति बनाती खेती से

खेती केवल फसल उगाने का काम नहीं है, यह किसान की पूरी ज़िंदगी, उसकी पूँजी, उसका समय और उसका भरोसा होती है। एक किसान जब कोई नया प्रयोग करता है,

31 Dec

नया साल, जीवन के उत्सव का प्रतीक

      ————- रवींद्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास”प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष , हिंदी विभाग, नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय ( संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ) , नालंदा |  

20 Oct

दीयों की झिलमिलाहट में बसी जीवन की रोशनी

दीपावली का त्योहार केवल प्रकाश का उत्सव नहीं है; यह हमारी संस्कृति, हमारी स्मृतियों और हमारी आस्थाओं का प्रतिबिंब है। अंधकार से उभरता यह प्रकाश हमें याद दिलाता है कि

9 Sep

नेपाल में लोकतंत्र की लड़ाई: प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली का इस्तीफा और युवा जनांदोलन

  के पी शर्मा ( खड्ग प्रसाद शर्मा ) ओली का इस्तीफा केवल राजनीतिक घटना नहीं बल्कि नेपाल के वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक परिदृश्य का भी सूचक है।

7 Jul

सामाजिक उन्नयन में मातृभाषा का योगदान

मनुष्य एक यौथ जीवी है। अपने को सुरक्षित रखने के लिए तथा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक दूसरे की तलाश किया। अपने साथी की खोज किया क्योंकि वह

20 Jun

भोजपुरी भाषा

भोजपुरी भाषा का उद्भव मागधी प्राकृत से माना जाता है, जो प्राचीन भारत की प्रमुख भाषाओं में से एक थी। मागधी प्राकृत, जिसे पाली के नाम से भी जाना जाता

15 Jun

निष्पक्ष प्रतिनिधि : एक निर्भीक, जनपक्षधर और वैचारिक पत्रकारिता

समकालीन पत्रकारिता के परिदृश्य में जब सूचनाएँ आँधी की गति से आती हैं और तथ्यों का मूल्यांकन भावनात्मक उत्तेजना के धुँधलकों में खो जाता है, तब एक ऐसा मंच—जो न

31 May

पत्रकारिता

धूप जब शब्दों की तरह फैलती है और छायाएँ संपादकीय रेखाओं  जैसी खिंच जाती हैं—उस समय हम समझ पाते हैं कि ‘मीडिया’ कोई वस्तु नहीं, वह एक सतत स्पंदन है

4 May

कृषि स्नातक स्वयं खेती क्यों नही करना चाहते

भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में यह एक विडंबना है कि कृषि की पढ़ाई करने वाले युवा खुद खेती करने से कतराते हैं। यह सवाल केवल एक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि ग्रामीण

4 May

कृषि स्नातक स्वयं खेती क्यों नही करना चाहते

भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में यह एक विडंबना है कि कृषि की पढ़ाई करने वाले युवा खुद खेती करने से कतराते हैं। यह सवाल केवल एक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि ग्रामीण