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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 24 Aug 2026 7:48 PM |   73 views

एआरटीओ कार्यालय में छापा, 11 संदिग्ध दलाल पकड़े

कानपुर नगर। एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सोमवार को प्रशासन ने शिकंजा कस दिया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह एवं एडीसीपी दक्षिण सुमित सुधाकर राम टेके के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एआरटीओ कार्यालय परिसर में औचक छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर और उसके आसपास सक्रिय मिले 11 संदिग्ध दलालों को पकड़ा गया। सभी से पूछताछ के साथ उनकी भूमिका और एआरटीओ कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों से संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है।
 
संयुक्त टीम अचानक एआरटीओ कार्यालय पहुंची और परिसर में मौजूद लोगों का सत्यापन शुरू करा दिया। टीम ने वाहन पंजीकरण, वाहन पोर्टल, ड्राइविंग लाइसेंस एवं सारथी पोर्टल से संबंधित सेवाओं और कार्यप्रणाली की जांच की। परिसर में संदिग्ध रूप से मौजूद व्यक्तियों से उनके वहां आने का कारण और उनके द्वारा कराए जा रहे कार्यों के संबंध में पूछताछ की गई। इसी दौरान 11 संदिग्ध दलाल चिन्हित किए गए। अब यह पता लगाया जा रहा है कि वे आवेदकों के संपर्क में कैसे आते थे और कार्यालय में किस तरह उनके काम कराते थे। पुलिस  
संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
 
कार्रवाई सिर्फ संदिग्ध दलालों की धरपकड़ तक सीमित नहीं रही। टीम ने वाहन पंजीकरण, स्वामित्व अंतरण, कर एवं शुल्क, वाहन फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, लर्नर लाइसेंस और ड्राइविंग टेस्ट से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले। कार्यालय में उपलब्ध नकदी का रजिस्टर, शुल्क प्राप्तियों और संबंधित अभिलेखों से मिलान कराया गया। प्रारंभिक जांच में नकदी और लेखा-अभिलेखों के मिलान में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। संबंधित रिकॉर्ड का दोबारा मिलान कर विसंगतियों के कारण और जिम्मेदारी का पता लगाया जा रहा है।
 
जांच का फोकस अब इस बात पर भी है कि संदिग्ध बिचौलियों की कार्यालय के भीतर पहुंच किस स्तर तक थी और क्या उन्हें किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी का संरक्षण या सहयोग मिल रहा था। यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया से सीधे सेवा देने के बजाय बिचौलियों के माध्यम से काम कराने की व्यवस्था तो नहीं पनप रही थी। जांच में किसी कार्मिक की मिलीभगत सामने आने पर उसकी भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जाएगी।
 
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित प्रक्रिया, समयसीमा और तय शुल्क पर सीधे उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। एआरटीओ कार्यालय में पकड़े गए संदिग्धों की भूमिका और सामने आई विसंगतियों की गहन जांच कराई जा रही है। किसी अधिकारी-कर्मचारी की बिचौलियों से मिलीभगत अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आई तो जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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