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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 2 Feb 2026 7:35 PM |   187 views

प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान आत्मनिर्भर बनें : डॉ. मांधाता सिंह

भाटपाररानी -कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी) मल्हना, देवरिया के सभागार में कृषि विभाग, देवरिया के माध्यम से कृषि सखियों के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मांधाता सिंह ने बताया कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है | बल्कि यह किसानों को रासायनिक खादों और दवाओं पर निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भर बनाता है। उन्होंने कहा कि दिन-प्रतिदिन खेती में रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से खेत की मिट्टी, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है, इसलिए आज के समय में प्राकृतिक खेती को अपनाना जरूरी है।

केंद्र के सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. कमलेश मीना ने बताया कि प्राकृतिक खेती की सफलता के लिए बीजामृत और जीवामृत जैसे गौ आधारित उत्पादों का उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बीजामृत से बीज उपचार करने पर फसल की कीट प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जीवामृत मिट्टी की उर्वरता को पुनर्स्थापित करता है, जिससे रासायनिक खादों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

गृह विज्ञान विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षण समन्वयक जय कुमार ने बताया कि पोषण उद्यान और रसोई बागीचे के माध्यम से प्राकृतिक खेती परिवारों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में भी वृद्धि होगी।

पशु जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. अंकुर शर्मा ने बताया कि पशुधन के बिना खेती करना अधूरी है और प्राकृतिक खेती में गौधन का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है।

कार्यक्रम में  कंचन देवी, सीमा देवी, ममता देवी, अफसाना, ज्ञांति देवी, सरोज शर्मा के साथ-साथ 60 कृषि सखियों ने भाग लिया।

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