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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 4 May 2026 7:45 PM |   631 views

कैंसर से जूझते हुए शोध पूरा करने वाली वर्षा कुमारी को पीएचडी उपाधि

नालंदा। गंभीर बीमारी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अदम्य संकल्प का परिचय देते हुए वर्षा कुमारी ने आचार्य सरहपा की कविता के आलोचनात्मक अध्ययन पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। हिंदी में सिद्ध साहित्य पर यह उल्लेखनीय कार्य माना जा रहा है। उनका यह सफर शैक्षणिक उपलब्धि के साथ-साथ संघर्ष और धैर्य का उल्लेखनीय उदाहरण माना जा रहा है।
 
वर्षा कुमारी लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं और उपचार के लिए उन्हें मुंबई, दिल्ली तथा गुरुग्राम के विभिन्न चिकित्सा केंद्रों में जाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपने शोध कार्य को निरंतर जारी रखा। अस्पताल और पुस्तकालय उनके जीवन में साथ-साथ चलते रहे। वर्षा कुमारी नालंदा जिले के पावापुरी के पास तेतरावां गांव की निवासी हैं।
 
नव नालंदा महाविहार में हुए पीएचडी प्रवेश साक्षात्कार में उनकी दृढ़ता और विषय के प्रति प्रतिबद्धता ने शिक्षकों को प्रभावित किया। उस समय कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ की उपस्थिति में आयोजित इस प्रक्रिया के बाद उन्होंने लगभग साढ़े तीन वर्षों में अपना शोध कार्य पूर्ण किया। वर्तमान में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में उनकी इस उपलब्धि को संस्थान की शैक्षणिक परंपरा की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
 
उनके शोध मार्गदर्शक हिंदी एवं भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास” रहे, जिनकी छवि एक सृजनात्मक लेखक, सहृदय प्रोफेसर और मनुष्यता के पक्षधर व्यक्तित्व के रूप में स्थापित है। उनके मार्गदर्शन में वर्षा कुमारी ने अपने शोध को न केवल अकादमिक स्तर पर बल्कि संवेदनात्मक गहराई के साथ विकसित किया।
 
शोध की मौखिकी परीक्षा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से आए प्रो. सदानंद शाही ने उनके कार्य की सराहना की। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. हरे कृष्ण तिवारी सहित अन्य शिक्षकों और साथियों—डॉ. अनुराग शर्मा, विकास सिंह, निकिता आनंद और शिवानी जायसवाल—का सहयोग उल्लेखनीय रहा। मानसिक सहयोग के स्तर पर वंदना श्रीवास्तव की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण रही।
 
वर्षा कुमारी साहित्यिक लेखन में भी सक्रिय हैं और बीमारी के दौरान भी उन्होंने लेखन जारी रखा। उनकी रचनाओं में जीवन-संघर्ष की गहराई और संवेदनात्मक ईमानदारी परिलक्षित होती है।
 
उनकी पीएचडी उपाधि प्राप्ति पर विश्वविद्यालय के सभी अध्यापकों, शोधार्थियों, छात्रों तथा गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने उन्हें बधाई दी है। शिक्षा जगत में उनकी इस उपलब्धि को प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति से लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
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