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By : nar singh | Published Date : 12 Dec 2022 2:41 PM |   485 views

लोकतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है पत्रकारिता | लेकिन मेरा मानना है कि पत्रकारिता तीनो स्तम्भों – विधायिका , कार्यपालिका और न्यायपालिका को सत्य पर आधारित तथ्यों का ज्ञान कराने /दिशा निर्देश करने वाला महत्वपूर्ण अंग है | पत्रकारिता चेतना पैदा करने वाला तत्व है | कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन निवास करता है | ठीक उसी तरह लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता आवश्यक है | पत्रकारिता का लोकतंत्र से गहरा सम्बन्ध है | प्रत्येक वस्तु का अपना धर्म होता है और धर्म ही आस्तित्व का कारण है |

पत्रकारिता का धर्म है निष्पक्षता , निर्भीकता और तथ्यों के आधार पर सत्य सूचनाओं का आदान -प्रदान करना है  | पत्रकारिता समाज का दर्पण है | जिसमे समाज का प्रतिबिम्ब परिलक्षित होता है | निष्पक्ष पत्रकारिता के अभाव में लोकतंत्र की कल्पना बेईमानी है |

लोकतंत्र का धर्म है ” सर्वजन सुखाय ,सर्वजन हिताय ” | धर्म छोड़ने का अर्थ है अस्तित्व को धोखा देना |आज दोनों के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लग गया है | पत्रकार समाज के भीतर उन स्थानों तक पहुँच जाता है , जहां दूसरे के लिए संभव नही होता | समस्याएं जहां पैदा होती हैं समाधान भी वहीँ रहता है |इसका विश्लेषण पत्रकारों से बढ़िया कौन कर सकता है ? लोकतंत्र के निर्माण में पत्रकारिता की अहम भूमिका होती है | पत्रकारों को अपने पत्रकारिता धर्म का पालन निष्ठा पूर्वक करना चाहिए | समाज को चाहिए कि इनको अपना काम करने का अवसर देने के साथ – साथ सुरक्षा प्रदान करें |

आज कल पत्रकारिता की साख निरंतर गिरती जा रही है , जिससे लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है | नागरिको में अपने उत्तरदायित्व बोध का अभाव दिखाई दे रहा है |यह लोकतंत्र के भविष्य के लिए शुभ संकेत नही है | पत्रकारिता के कमजोर होने का मतलब है लोकतंत्र के नीव को कमजोर करना |लोकतंत्र कमजोर हो गया तो शोषको के लिए शोषण का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा |

प्रिंट / इलेक्ट्रॉनिक / सोशल मीडिया को जन सरोकारों के मुद्दों को राष्ट्रीय फलक तक पहुचाना चाहिए  जिससे उन समस्यायों का निस्तारण हो सके | आज सैकड़ो न्यूज़ चैनल  हैं परन्तु कंटेंट एक जैसा होता है  ,यह क्या है ?  जागरूक और संवेदन शील नागरिको को इससे परेशानी होती है | खबरों की दुनिया में संकट सा दिखाई पड़ रहा है | न्यूज़ चैनल्स अब पार्टी आधारित हो चुके है | वैचारिकता का ध्रुवीकरण हो चूका है |

जिस प्रकार से सरकार के लिए मजबूत विपक्ष की जरुरत है ठीक उसी प्रकार से मजबूत लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता की आवश्यकता है | निष्पक्ष पत्रकारिता  के लिए  समाज के हर वर्ग के लोगो को ईमानदार और न्यायप्रिय होना होगा | तभी एक नए  भारत  का निर्माण हो सकेगा |

 

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