रामनवमी
किसी पर्व के ऐतिहासिक या पौराणिक पृष्ठभूमि को नकारा नही जा सकता है |पर्व मानव सभ्यता और संस्कृति के वाहक हैं , जो पीढ़ी दर पीढ़ी तक जीवंत होतें है
किसी पर्व के ऐतिहासिक या पौराणिक पृष्ठभूमि को नकारा नही जा सकता है |पर्व मानव सभ्यता और संस्कृति के वाहक हैं , जो पीढ़ी दर पीढ़ी तक जीवंत होतें है
बसंत महोत्सव का ही दूसरा नाम होली है |यह त्यौहार मूल रूप से आर्यों का त्यौहार है |आप सभी जानते हैं कि आर्यों की मातृभूमि मध्य एशिया थी |यह क्षेत्र
महाशिवरात्रि का पर्व हिन्दुओं के लिए अति महत्वपूर्ण है |जिसके आराध्यदेव देवादिदेव ‘ शिव ‘हैं |शिव के पूजा अर्चना के साथ यह पर्व मनाया जाता है | ” नमस्तुभ्यम विरुपाक्ष
गुरू रविदास (रैदास) का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा दिन रविवार को संवत 1398 को हुआ था।उनके जन्म के बारे में एक दोहा प्रचलित है । चौदह से तैंतीस कि
भारत पर्वो का देश है और यहाँ का प्रत्येक पर्व एक नया सन्देश देता है | जैसे जीवन जीने की कला का इजहार , समाज में मानवीय मूल्यों एवं आदर्शों
महात्मा बुद्ध प्रवचन सभा में आकर मौन बैठ गये। शिष्य समुदाय उनके इस मौन के कारण चिंतित हुए कि कहीं वे अस्वस्थ तो नहीं है। आखिर एक शिष्य ने
भारत की सांस्कृतिक पहचान पर्वों में ही समाहित है |भारत भूमि पर जितने भी पर्व , उत्सव , अनुष्ठान मनाये जातें हैं , उनके पीछे एक विश्वास ,आस्था ,ऐतिहासिक घटनायें
मकर संक्रांति से पहले लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है |इस त्यौहार में नई फसलो की पूजा करने की परम्परा है |यह खास तौर पर पंजाब और हरियाणा में मनाई
हम सभी एक दुसरे को 1st जनवरी को हैप्पी न्यू ईयर / नव वर्ष की शुभकामना देते हैं |किन्तु क्या कभी आपने सोचा है की हमलोग ऐसा क्यू करते है
क्रिसमस या बड़ा दिन ईसामसीह \ यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला पर्व है |यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष 25 दिसम्बर को बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के
क्रिसमस या बड़ा दिन ईसामसीह \ यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला पर्व है |यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष 25 दिसम्बर को बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के