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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 25 Dec 2019 8:26 AM |   1881 views

क्रिसमस डे

क्रिसमस या बड़ा दिन ईसामसीह \ यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला पर्व है |यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष 25 दिसम्बर को बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | इस त्यौहार पर क्रिसमस पेड़ को लोग सजाते हैं ,प्रार्थना करतें है ,एक दूसरे को उपहार बाटतें है , और मिल जुलकर भोजन करते हैं |  छोटे -बच्चो को इस दिन सांता क्लाज द्वारा दिये जाने वाले उपहारों का इंतज़ार भी रहता है |  

अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि सांता क्लाज कौन है ?जो बच्चो को उपहार देता है और यह क्रिसमस ट्री क्या है? तो आईये जानते है इसके बारे में –

  

चौथी शताब्दी में एशिया माइनर के मायरा (अब तुर्की) में सेंट निकोलस  नाम का एक शख्स रहता था| जो काफी अमीर था, लेकिन उनके माता-पिता का देहांत हो चुका था| सेंट निकोलस ज्यादातर चुपके से गरीब लोगों की मदद किया करते थे| उन्हें सीक्रेट गिफ्ट  देकर खुश करने की कोशिश करते थे|

एक दिन निकोलस (Saint Nicholas) को पता चला कि एक गरीब आदमी की तीन बेटियां है, जिनकी शादियों के लिए उसके पास बिल्कुल भी पैसा नही है| ये बात जान निकोलस इस शख्स की मदद करने पहुंचे| एक रात वो इस आदमी की घर की छत में लगी चिमनी के पास पहुंचे और वहां से सोने से भरा बैग डाल दिया| उस दौरान इस गरीब शख्स ने अपना मोज़ा सुखाने के लिए चिमनी में लगा रखा था|

इस मोज़े में अचानक सोने से भरा बैग उसके घर में गिरा| ऐसा एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुआ| आखिरी बार में इस आदमी ने निकोलस  को देख लिया| निकोलस ने यह बात किसी को ना बताने के लिए कहा|

लेकिन ऐसी बातें छिपती कहा हैं. जब भी किसी को सीक्रेट गिफ्ट मिलता सभी को ये लगता कि यह निकोलस ने दिया है| धीरे-धीरे निकोलस की ये कहानी पॉपुलर हुई. क्योंकि क्रिसमस के दिन बच्चों को तोहफे देने का प्रथा रही है| इसीलिए ऐसा कहा जाता है कि सबसे पहले यूके  में निकोलस की कहानी (St. Nicholas Story) को आधार बनाया और उन्हें फादर क्रिसमस (Father Christmas) और ओल्ड मैन क्रिसमस नाम दिया गया|

इसके बाद पूरी दुनिया में क्रिसमस के दिन मोज़े में गिफ्ट देने यानी सीक्रेट सैंटा (Secret Santa) बनने का रिवाज आगे बढ़ता चला गया|

जिस प्रकार से ईसाईयों ने क्रिसमस को रोमन पैगनों के Saturnalia फेस्टिवल से जोड़ा था इसी प्रकार से ऐशेरा संप्रदाय  के अनुयायी और इसकी शाखा के सदस्यों को चुना गया जो कि “क्रिसमस ट्री” को मानते थे और इम्पोर्टेंस देते थे|

ऐसा माना जाता है कि पैगनों ने सदियों से जंगल में पेड़ों की पूजा की थी, उन्हें अपने घरों में उगाया था और सजाया था. इसलिए इस सेरेमनी को चर्च में ईसाईयों द्वारा आनंद के साथ मनाया जाने लगा|

क्या आप जानते हैं कि 1510 में क्रिसमस ट्री को सजा के सबसे पहले रीगा, लात्विया में रखा गया था? जर्मनी में पहले क्रिसमस ट्री को सेब, ginger bread, वेफर्स और मिठाइयों से सजाया गया था|  विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार के पेड़ों का उपयोग क्रिसमस ट्री के रूप में किया जाता है और हर बार वे देवदार के पेड़  नहीं होते हैं. जैसे न्यूजीलैंड में – ‘Pohutakawa’ का पेड़ का उपयोग किया जाता है और इसमें लाल फूल होते हैं|

1950 और 60 के दशक में एल्यूमीनियम और पीवीसी प्लास्टिक के पेड़ों का बड़े पैमाने पर कृत्रिम  क्रिसमस ट्री के रूप में उत्पादन हुआ|

कृत्रिम  पेड़ों ने महत्वपूर्ण लोकप्रियता हासिल की, खासकर उन देशों में जहां ताजे पेड़ों की खरीद मुश्किल थी| ऐसा माना जाता है कि असली क्रिसमस ट्री हवा से धूल और pollens को हवा  से हटाने में मदद करते हैं| 

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