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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Sep 2026 6:58 PM |   262 views

पूर्वांचल में मखाना की खेती की अपार सम्भावनाए

मुख्य रूप से पानी भरे तालाबों या खेतों में की जाने वाली एक अत्यधिक लाभदायक जलीय खेती है मखाना!, जो बिहार में प्रमुखता से (80-85%) होती है। परन्तु पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी मखाना की खेती हेतु प्रयास 1-2 फीट स्थिर पानी, 20-35°C तापमान और चिकनी दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी होती है। मार्च-अप्रैल में रोपाई (Transplanting) और अगस्त-सितंबर में कटाई की जाती है, जिससे प्रति एकड़ 10-12 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है! पूर्वांचल (उत्तर प्रदेश) में मखाना की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है, विशेषकर कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, बलिया, महाराजगंज, गोरखपुर और बस्ती जिलों में, जहाँ जलभराव वाले तालाब हैं। सरकार द्वारा ‘मखाना विकास योजना’ के तहत अनुदान और चंदौली में ‘मखाना एक्सीलेंस सेंटर’ (6 करोड़ रु.) स्थापित किया जा रहा है, जिससे किसान 1 एकड़ में रु 1.8 से रु 3 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। 
 
पूर्वांचल में मखाना खेती की प्रमुख बातें:
 
उपयुक्त क्षेत्र: कम गहराई वाले तालाब, जलभराव वाले खेत (Low land area), और जहां सिंघाड़े की खेती होती है।
 
समय और प्रक्रिया: दिसंबर-जनवरी में बीज डाले जाते हैं और मार्च में रोपाई की जाती है। यह फसल 4-5 महीने की होती है।
 
सरकारी सहयोग: 158 लाख रुपये का बजट जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए स्वीकृत है।
 
मुनाफा: प्रति एकड़ लगभग 10 क्विंटल बीज और 4-5 क्विंटल लावा (प्रोसेस्ड मखाना) की उपज प्राप्त होती है।
 
फायदे: मछली पालन के साथ मखाना (एकीकृत कृषि) से आमदनी दोगुनी हो जाती है। 
 
गोरखपुर मंडल (देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, गोरखपुर) में इसे बढ़ावा देने के लिए 33 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विशेष जोर दिया जा रहा है, और प्रति एकड़ सब्सिडी भी उपलब्ध है। 
 
– प्रो रवि प्रकाश मौर्य 
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