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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 21 Oct 2026 7:12 PM |   10 views

उद्यानिकी फसलों की कटाई उपरांत GMP अपनाएं

भारत में फल, सब्जियों और अन्य उद्यानिकी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। उपभोक्ता अब केवल अच्छी दिखने वाली उपज ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और उचित तरीके से पैक किए गए उत्पाद भी चाहते हैं। ऐसे में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन बढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण है कटाई के बाद उनकी गुणवत्ता बनाए रखना। कटाई के समय की लापरवाही, अस्वच्छ उपकरण, अनुचित छँटाई, गलत तापमान, खराब पैकेजिंग और परिवहन में होने वाली क्षति के कारण उत्पादों की गुणवत्ता घट सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इन समस्याओं को कम करने में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (Good Manufacturing Practices—GMP)* की महत्वपूर्ण भूमिका है। GMP का उद्देश्य उत्पादन और उत्पादों के प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं में स्वच्छता, सुव्यवस्था, उचित कार्य-पद्धति और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना है। उद्यानिकी उत्पादों के संदर्भ में GMP को कटाई उपरांत प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों और गुड हाइजीन प्रैक्टिस (Good Hygiene Practices—GHP) के साथ अपनाना उपयोगी है।
 
GMP क्या है और उद्यानिकी में इसका महत्व क्यों है?
GMP ऐसी प्रक्रियाओं और कार्य-पद्धतियों का समूह है, जिनका उद्देश्य उत्पादों के प्रबंधन के दौरान संदूषण की आशंका कम करना तथा उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना है। फल-सब्जियों की कटाई, संग्रहण, सफाई, छँटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन के दौरान इन सिद्धांतों को अपनाया जा सकता है।
 
खेत से मंडी, संग्रहण केंद्र, पैकहाउस, प्रसंस्करण इकाई या खुदरा बाजार तक पहुँचने के बीच उत्पाद अनेक चरणों से गुजरता है। यदि किसी एक चरण में भी स्वच्छता या उचित हैंडलिंग की कमी रह जाए, तो उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए GMP को केवल पैकिंग या प्रसंस्करण इकाई तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे संपूर्ण कटाई उपरांत प्रबंधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए।
 
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के खाद्य सुरक्षा प्रबंधन संबंधी प्रावधानों में लागू खाद्य व्यवसायों के लिए GMP और GHP आधारित व्यवस्था का महत्व बताया गया है। खाद्य व्यवसायों के लिए लाइसेंस एवं पंजीकरण संबंधी विनियमों, विशेष रूप से Schedule 4, में गतिविधि के अनुसार स्वच्छता और सैनिटेशन संबंधी आवश्यकताएँ निर्धारित हैं। [1]
 
1. कर्मचारियों का प्रशिक्षण और व्यक्तिगत स्वच्छता-
कटाई उपरांत प्रबंधन में काम करने वाले कर्मचारी उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फल-सब्जियों को संभालने, छाँटने, धोने, पैक करने और भंडारित करने वाले कर्मचारियों को स्वच्छता संबंधी नियमों तथा सुरक्षित कार्य-पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
 
कर्मचारियों को काम के दौरान साफ कपड़े पहनने, आवश्यकता के अनुसार सिर ढकने, हाथों की उचित सफाई करने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की आदत विकसित करनी चाहिए। खुले घाव, संक्रमण या ऐसी बीमारी की स्थिति में, जिससे उत्पाद दूषित होने का जोखिम हो, संबंधित व्यक्ति को उत्पाद के सीधे संपर्क वाले कार्य से दूर रखना चाहिए अथवा निर्धारित सुरक्षा उपाय लागू करने चाहिए।
 
हाथ धोने के लिए स्वच्छ पानी, उपयुक्त साबुन और साफ-सुथरी सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। दस्तानों का उपयोग जहाँ आवश्यक हो, वहाँ किया जा सकता है, लेकिन दस्ताने हाथ धोने और व्यक्तिगत स्वच्छता का विकल्प नहीं हैं। कर्मचारियों को आभूषण, घड़ियों तथा अन्य ऐसी वस्तुओं के उपयोग से बचना चाहिए जो उत्पाद में गिर सकती हैं या संदूषण का कारण बन सकती हैं।
 
प्रशिक्षण के साथ कर्मचारियों की जिम्मेदारियाँ भी स्पष्ट होनी चाहिए। प्रशिक्षण, सफाई और स्वच्छता से जुड़े अभिलेख रखने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
 
2. उपकरणों की सफाई और रखरखाव-
कटाई उपरांत उपयोग किए जाने वाले चाकू, कैंची, क्रेट, कन्वेयर, ग्रेडिंग मशीन, धोने की टंकियाँ, तौल मशीन और पैकेजिंग उपकरण साफ तथा अच्छी कार्यशील स्थिति में होने चाहिए। गंदे उपकरणों के संपर्क से मिट्टी, सड़न पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव या अन्य संदूषक एक उत्पाद से दूसरे उत्पाद तक पहुँच सकते हैं।
 
उपकरणों की नियमित सफाई और आवश्यकतानुसार सैनिटाइजेशन के लिए लिखित प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए। सफाई में उपयोग होने वाले रसायनों का चयन उनके निर्धारित उपयोग और संबंधित नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। जहाँ खाद्य उत्पादों से संपर्क होता है, वहाँ उपयुक्त खाद्य-संपर्क सामग्री और सुरक्षित सफाई पद्धतियों का उपयोग आवश्यक है।
 
उपकरणों का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि उनकी सफाई और निरीक्षण आसानी से किया जा सके। दरारों, बंद जगहों या ऐसे हिस्सों में जहाँ गंदगी और नमी जमा हो सकती है, विशेष ध्यान देना चाहिए। मशीनों की मरम्मत और रखरखाव समय पर किया जाए तथा मरम्मत के बाद यह सुनिश्चित किया जाए कि उपकरण दोबारा उपयोग के लिए साफ और सुरक्षित हैं।
 
3. स्वच्छ भवन और कार्यस्थल-
फल-सब्जियों की छँटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और भंडारण वाले स्थानों को साफ, सुव्यवस्थित और कीटों से सुरक्षित रखना चाहिए। फर्श पर पानी जमा नहीं होना चाहिए तथा दीवारों, छतों और फर्श में ऐसी दरारें या छेद नहीं होने चाहिए जिनसे कीट, धूल या अन्य संदूषक प्रवेश कर सकें।
 
खिड़कियों और दरवाजों पर आवश्यकतानुसार जाली या अन्य सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। भवन में पर्याप्त प्रकाश, वायु-संचार और उचित जल निकासी की सुविधा होनी चाहिए। जहाँ उत्पाद खुले रूप में रखे जाते हैं, वहाँ धूल, पक्षियों, पालतू पशुओं और अन्य स्रोतों से संदूषण रोकने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
 
शौचालय और हाथ धोने की सुविधाएँ कार्यस्थल से उचित तरीके से व्यवस्थित होनी चाहिए। सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायनों को उत्पादों, पैकेजिंग सामग्री और अन्य खाद्य-संपर्क वस्तुओं से अलग, स्पष्ट रूप से पहचान योग्य स्थान पर रखा जाना चाहिए।
 
4. कटाई और प्रारंभिक संग्रहण में सावधानी-
अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद की शुरुआत सही समय पर कटाई से होती है। फल और सब्जियाँ उपयुक्त परिपक्वता अवस्था में तोड़ी जानी चाहिए। कटाई का समय, तरीका और उपयोग किए जाने वाले उपकरण संबंधित फसल की प्रकृति के अनुसार तय होने चाहिए।
 
कटाई के बाद उत्पादों को जमीन पर सीधे रखने से बचना चाहिए। साफ क्रेट या उपयुक्त कंटेनरों का उपयोग करना चाहिए। कंटेनरों को इतना अधिक नहीं भरना चाहिए कि ऊपर रखे उत्पादों के भार से नीचे के उत्पाद दबकर क्षतिग्रस्त हो जाएँ।
 
फल-सब्जियों को फेंकने, अनावश्यक रूप से पटकने या अधिक ऊँचाई से गिराने से बचना चाहिए। चोटग्रस्त उत्पादों में सड़न तेजी से बढ़ सकती है, जिससे आसपास रखे उत्पाद भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए कटाई के तुरंत बाद छाया में रखने और खेत से संग्रहण केंद्र तक सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था उपयोगी है।
 
कटाई के दौरान खेत में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के अवशेष, मिट्टी और अन्य संदूषण की आशंका को भी ध्यान में रखना चाहिए। जहाँ धुलाई आवश्यक हो, वहाँ उपयुक्त गुणवत्ता वाले पानी और साफ उपकरणों का उपयोग किया जाना चाहिए। धुलाई के बाद उत्पादों को ऐसी स्थिति में रखना चाहिए जिससे अनावश्यक नमी और पुनः संदूषण की समस्या न हो।
 
5. छँटाई, ग्रेडिंग और गुणवत्ता नियंत्रण-
छँटाई और ग्रेडिंग से उत्पादों को आकार, रंग, परिपक्वता, गुणवत्ता और बाजार की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे विपणन आसान होता है और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों को उपयुक्त बाजार तक पहुँचाने में सहायता मिलती है।
 
सड़े हुए, फफूँद लगे, अत्यधिक चोटग्रस्त या अन्य प्रकार से अनुपयुक्त उत्पादों को स्वस्थ उत्पादों से अलग रखना चाहिए। ऐसे उत्पादों को केवल दूसरे डिब्बे में रखकर बाजार भेज देना उचित नहीं है। उनकी स्थिति के अनुसार सुरक्षित निपटान या अन्य वैध उपयोग का निर्णय लिया जाना चाहिए।
 
ग्रेडिंग के मानक फसल और बाजार की जरूरत के अनुसार निर्धारित होने चाहिए। आकार या बाहरी रंग के आधार पर छँटाई करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दिखाई देने वाली अच्छी गुणवत्ता हमेशा खाद्य सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। जहाँ जोखिम की आशंका हो, वहाँ उपयुक्त निरीक्षण और परीक्षण आवश्यक हो सकते हैं।
 
6. प्री-कूलिंग, भंडारण और तापमान प्रबंधन-
कटाई के बाद कई फल-सब्जियों में श्वसन और अन्य जैविक प्रक्रियाएँ जारी रहती हैं। तापमान और नमी की अनुचित स्थिति के कारण उनकी गुणवत्ता तेजी से घट सकती है। कुछ फसलों में कटाई के बाद उपयुक्त प्री-कूलिंग तथा नियंत्रित भंडारण से गुणवत्ता बनाए रखने और विपणन अवधि बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
 
हालाँकि, सभी फलों और सब्जियों के लिए एक ही तापमान या आर्द्रता उपयुक्त नहीं होती। भंडारण की परिस्थितियाँ फसल, किस्म, परिपक्वता, भंडारण अवधि और परिवहन की आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। कुछ फसलें अत्यधिक कम तापमान पर शीत-क्षति का शिकार हो सकती हैं। इसलिए बिना वैज्ञानिक जानकारी के तापमान घटाना नुकसानदायक भी हो सकता है।
शीतगृह और भंडारण कक्ष साफ होने चाहिए। तापमान की नियमित निगरानी की जानी चाहिए और आवश्यकतानुसार अभिलेख रखे जाने चाहिए। उत्पादों को इस प्रकार व्यवस्थित करना चाहिए कि हवा का प्रवाह बाधित न हो और सफाई तथा निरीक्षण करना आसान रहे।
 
7. उपयुक्त पैकेजिंग और सुरक्षित परिवहन-
पैकेजिंग का उद्देश्य केवल उत्पाद को आकर्षक दिखाना नहीं है, बल्कि उसे दबाव, घर्षण, चोट, धूल और परिवहन के दौरान होने वाली क्षति से बचाना भी है। पैकेजिंग सामग्री फसल की प्रकृति, वजन, आकार, परिवहन की दूरी और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप चुनी जानी चाहिए।
 
फल-सब्जियों के लिए साफ, मजबूत और उपयुक्त वेंटिलेशन वाले क्रेट या पैक उपयोगी हो सकते हैं। पैकेजिंग के दौरान उत्पाद को अनावश्यक रूप से दबाने से बचना चाहिए। पुनः उपयोग किए जाने वाले क्रेटों को अगली खेप के उपयोग से पहले उचित तरीके से साफ किया जाना चाहिए।
 
परिवहन वाहन साफ, सूखे और उत्पाद के अनुरूप होने चाहिए। फल-सब्जियों को ऐसे रसायनों, ईंधन, कचरे या अन्य वस्तुओं के साथ नहीं ले जाना चाहिए जिनसे संदूषण का जोखिम हो। जिन उत्पादों के लिए तापमान नियंत्रित परिवहन आवश्यक है, उनके लिए उपयुक्त व्यवस्था की जानी चाहिए।
पैक किए गए खाद्य उत्पादों में पैकेजिंग सामग्री, लेबलिंग और अन्य आवश्यकताओं का अनुपालन संबंधित FSSAI विनियमों तथा लागू संशोधनों के अनुसार किया जाना चाहिए। 
 
8. FIFO, FEFO और भंडार प्रबंधन-
भंडारण में उत्पादों की आवक, गुणवत्ता, मात्रा और निकासी का रिकॉर्ड रखना उपयोगी है। FIFO यानी First In, First Out के अनुसार पहले प्राप्त उत्पाद को पहले निकाला जाता है। FEFO यानी First Expiry, First Out के अनुसार जिसकी उपयोग-अवधि पहले समाप्त होने वाली हो, उसे प्राथमिकता दी जाती है।
 
किस पद्धति का उपयोग करना है, यह उत्पाद की प्रकृति और उसके जोखिम पर निर्भर करता है। जहाँ उत्पाद की उपयोग-अवधि स्पष्ट रूप से निर्धारित हो, वहाँ FEFO विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है। ताजे फल-सब्जियों में वास्तविक गुणवत्ता, पकने की अवस्था, खराब होने की आशंका और भंडारण अवधि की नियमित निगरानी भी आवश्यक है।
 
भंडार में आवश्यकता से अधिक उत्पाद जमा करने से बचना चाहिए। उत्पादों को अलग-अलग खेप के रूप में पहचानना, नियमित निरीक्षण करना और क्षतिग्रस्त पैकेटों को तुरंत अलग करना चाहिए। खाद्य व्यवसायों में रिकॉर्ड रखने और स्टॉक रोटेशन संबंधी आवश्यकताओं को लागू नियमों के नवीनतम संस्करण के अनुसार समझना चाहिए।
 
9. संदिग्ध और खराब उत्पादों का पृथक्करण-
भंडारण या पैकिंग के दौरान यदि किसी खेप में सड़न, असामान्य गंध, फफूँद, संदूषण या अन्य गंभीर गुणवत्ता संबंधी समस्या दिखाई दे, तो उसे स्वस्थ उत्पादों से अलग रखना चाहिए। संदिग्ध खेप को बिना जाँच के अन्य उत्पादों में मिलाना या बाजार में भेजना उचित नहीं है।
 
उत्पाद की प्रकृति और जोखिम के अनुसार उसका निरीक्षण, आवश्यक परीक्षण, सुरक्षित निपटान या अन्य अनुमत कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रसंस्कृत खाद्य व्यवसायों में आवश्यकता के अनुसार उत्पाद वापस मँगाने की प्रक्रिया (रिकॉल), संबंधित पक्षों को सूचना देने और खेप की पहचान करने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
 
10. रिकॉर्ड, पहचान और ट्रेसबिलिटी-
GMP का प्रभावी क्रियान्वयन केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है। उत्पाद कहाँ से आया, किस तारीख को प्राप्त हुआ, उसकी छँटाई और पैकिंग कब हुई, उसे किन परिस्थितियों में रखा गया और कहाँ भेजा गया—ऐसी जानकारी का उचित रिकॉर्ड उत्पाद की पहचान और समस्या की स्थिति में जाँच में सहायता करता है।
 
खेप संख्या, प्राप्ति तिथि, आपूर्तिकर्ता, गुणवत्ता निरीक्षण, सफाई, तापमान निगरानी और उत्पाद की निकासी से जुड़े रिकॉर्ड, जहाँ आवश्यक हों, व्यवस्थित रूप से रखे जाने चाहिए। इससे गुणवत्ता संबंधी शिकायत की स्थिति में प्रभावित खेप की पहचान करना और उचित कार्रवाई करना आसान हो सकता है।
 
छोटे किसान और किसान उत्पादक संगठन भी सरल रजिस्टर, बैच पहचान, साफ क्रेट और नियमित निरीक्षण जैसी कम लागत वाली व्यवस्थाओं से शुरुआत कर सकते हैं। रिकॉर्ड प्रणाली का स्वरूप व्यवसाय के आकार, जोखिम और लागू कानूनी आवश्यकताओं के अनुसार होना चाहिए।
 
11. किसानों और उद्यमियों को क्या लाभ होगा?
GMP और वैज्ञानिक कटाई उपरांत प्रबंधन अपनाने से उत्पादों की चोट, संदूषण और अनुचित भंडारण से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। बेहतर ग्रेडिंग, उपयुक्त पैकेजिंग और नियमित गुणवत्ता निरीक्षण से बाजार में उत्पाद की स्वीकार्यता बढ़ सकती है।
 
इसके अतिरिक्त, व्यवस्थित भंडारण और खेप की पहचान से व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, प्रसंस्करण इकाइयों और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करने में सहायता मिलती है। किसान उत्पादक संगठन और छोटे उद्यम सामूहिक रूप से साफ-सुथरे संग्रहण केंद्र, ग्रेडिंग सुविधाएँ, क्रेट, पैकेजिंग व्यवस्था तथा आवश्यक प्रशिक्षण की सुविधा विकसित कर सकते हैं।
 
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि GMP अकेले सभी प्रकार के कटाई उपरांत नुकसान को समाप्त नहीं कर सकता। इसका प्रभाव फसल, मौसम, बाजार, आधारभूत सुविधाओं और अपनाई गई तकनीक पर निर्भर करता है। फिर भी, सही तरीके से लागू किए जाने पर यह गुणवत्ता प्रबंधन की मजबूत आधारशिला बन सकता है।
 
12. GMP लागू करने की व्यावहारिक शुरुआत-
किसान, किसान उत्पादक संगठन, पैकहाउस और छोटे उद्यानिकी उद्यम निम्नलिखित कदमों से शुरुआत कर सकते हैं:
  • कटाई और संग्रहण के लिए साफ उपकरण तथा क्रेट उपलब्ध कराएँ।
  • कर्मचारियों को व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित हैंडलिंग का प्रशिक्षण दें।
  • खराब और स्वस्थ उत्पादों को अलग रखने की व्यवस्था बनाएँ।
  • कार्यस्थल, उपकरण और भंडारण क्षेत्र की नियमित सफाई करें।
  • फसल के अनुसार तापमान, आर्द्रता और भंडारण अवधि तय करें।
  • उपयुक्त पैकेजिंग तथा सुरक्षित परिवहन अपनाएँ।
  • उत्पाद की आवक, गुणवत्ता निरीक्षण और निकासी के रिकॉर्ड रखें।
  •  लागू खाद्य सुरक्षा नियमों, लाइसेंस और पंजीकरण संबंधी आवश्यकताओं की पुष्टि करें।
छोटे स्तर पर भी इन उपायों को नियमित रूप से अपनाना महत्वपूर्ण है। समय-समय पर निरीक्षण करके कमियों की पहचान की जा सकती है और सुधार के लिए जिम्मेदार व्यक्ति तथा समय-सीमा तय की जा सकती है।
 
निष्कर्ष-
उद्यानिकी फसलों की कटाई उपरांत गुणवत्ता बनाए रखना किसानों की आय, उपभोक्ताओं की सुरक्षा और कृषि व्यवसाय की प्रतिस्पर्धात्मकता से सीधे जुड़ा है। वैज्ञानिक कटाई, स्वच्छ उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारी, उचित छँटाई, उपयुक्त पैकेजिंग, फसल-विशिष्ट भंडारण और व्यवस्थित रिकॉर्ड प्रबंधन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
 
GMP को केवल औपचारिक नियम न मानकर दैनिक कार्य-पद्धति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। किसान, किसान उत्पादक संगठन, संग्रहण केंद्र, पैकहाउस और प्रसंस्करण इकाइयाँ मिलकर इन सिद्धांतों को अपनाएँ, तो उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और अनावश्यक नुकसान कम करने की दिशा में ठोस प्रगति की जा सकती है।
 
कटाई के बाद सही प्रबंधन अपनाएँ, गुणवत्ता बनाए रखें और उद्यानिकी उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें।
 
–डॉ. शुभम कुमार कुलश्रेष्ठ ,विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापक – उद्यान विभाग ,(कृषि संकाय)
रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, रायसेन, मध्य प्रदेश
 
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