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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 1 Sep 2026 6:47 PM |   15 views

सुरक्षित भोजन से स्वस्थ जीवन के राज

हमारे जीवन में भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं है। यह हमारे स्वास्थ्य, हमारी कार्यक्षमता, हमारी जीवनशैली और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। फिर भी आज भोजन खरीदते समय हम अक्सर उसकी कीमत, पैकेजिंग और ब्रांड को देखते हैं, लेकिन यह जानने की कोशिश कम करते हैं कि वह हमारे घर तक पहुंचने से पहले किन प्रक्रियाओं से गुजरा है।
 
बाजार में विकल्प पहले से कहीं अधिक हैं। अनाज, दालें, तेल, मसाले, आटा, घी और अन्य खाद्य पदार्थों के अनेक ब्रांड उपलब्ध हैं। ऐसे में उपभोक्ता के लिए सबसे जरूरी है कि वह केवल आकर्षक दावों के आधार पर नहीं, बल्कि सही जानकारी के आधार पर भोजन का चुनाव करे।
 
भोजन की गुणवत्ता केवल खेत से तय नहीं होती-
अच्छे भोजन की शुरुआत अच्छे कृषि उत्पाद से जरूर होती है, लेकिन उसकी गुणवत्ता वहीं समाप्त नहीं होती। उत्पादन के बाद उसकी सफाई, प्रसंस्करण, भंडारण, पैकेजिंग और उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।इसलिए किसी खाद्य पदार्थ को खरीदते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि वह देखने में अच्छा है या उसका पैकेट आकर्षक है। यह समझना भी जरूरी है कि उसमें क्या है, उसे कैसे तैयार किया गया है और वह किस प्रकार हमारे घर तक पहुंचा है।
 
खरीदारी की आदत में छोटे बदलाव, बड़ा प्रभाव-
राशन खरीदते समय कुछ सरल प्रश्न हमारी आदत का हिस्सा बन सकते हैं।
  • क्या मैं इस उत्पाद के प्रमुख तत्व जानता हूं?
  • इसे किस प्रकार प्रोसेस किया गया है?
  • क्या पैकेजिंग और जानकारी स्पष्ट है?
  • क्या उत्पाद उचित तरीके से भंडारित है?
  •  क्या इसकी कीमत उसकी गुणवत्ता और मात्रा के अनुरूप है?
  • खरीदे जा रहे उत्पाद मे कितने % preservative, flavour, रंग इत्यादि मिले हुए हैँ?
  • उत्पाद का वजन क्या है?
 
इन सवालों के लिए किसी विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं है। केवल जागरूक उपभोक्ता बनना जरूरी है।
 
पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक समझ से जोड़ना होगा-
भारत की खाद्य संस्कृति सदियों से स्थानीय कृषि, मौसम और उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी रही है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनाज, दालें, तिलहन, मसाले और पारंपरिक प्रसंस्करण विधियां हमारी खाद्य विविधता की पहचान रही हैं।
 
आधुनिक जीवन में सुविधा जरूरी है, लेकिन सुविधा के साथ भोजन के प्रति समझ भी जरूरी है। हमें पुरानी हर बात को अपनाने या आधुनिक हर प्रक्रिया को छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता है कि हम तथ्य, गुणवत्ता और आवश्यकता के आधार पर सही चुनाव करना सीखें।
 
स्वास्थ्य की शुरुआत जागरूक थाली से होती है-
स्वास्थ्य केवल बीमारी न होने का नाम नहीं है। यह हमारी रोजमर्रा की आदतों का परिणाम है और भोजन उन आदतों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए अगली बार जब हम बाजार से कोई खाद्य पदार्थ खरीदें, तो केवल यह न पूछें कि कितने का है?
 
एक सवाल और पूछें:
क्या मैं जानता हूं कि मैं अपने परिवार के लिए क्या खरीद रहा हूं?
यही छोटा-सा सवाल हमारी राशन टोकरी को अधिक समझदारीपूर्ण बना सकता है।
स्वस्थ अपनाइये, स्वस्थ रहिये।आइये…भोजन को सिर्फ स्वाद नहीं, विश्वास बनाइये।
प्रकृति से जुड़िये, अपने भोजन को समझिये और हर निवाले में बेहतर कल चुनिये।
 
डॉ. शुभम कुमार कुलश्रेष्ठ,विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापक – उद्यान विभाग (कृषि संकाय)
रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, रायसेन, मध्य प्रदेश
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