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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 1 Sep 2026 7:02 PM |   118 views

स्त्रियाँ

स्त्रियाँ कुछ भी जाया नहीं करती 
सहेजती हैं ,सजाती हैं 
संभालती हैं , 
सिलती हैं फटे कपड़े, जोड़ती हैं 
टूटे गमले, ढाँकती है मायूसी को अपनी मुस्कुराहट में ।
छिपाती है थकान 
कमर पर कसी पल्ले की ठसक से 
ऊर्जा से अपनी 
घर भरती हैं ।
स्त्रियाँ कुछ भी ज़ाया नहीं करती हैं ।
 
हर कोने को नया रूप देती 
बिखरे साज़-ओ-समान को 
क़रीने से लगाती 
अपने ख्वाबों को कपड़ो की 
तह में लपेटती 
उधड़े रिश्तों को अपने प्यार के 
ताने बाने में पिरोतीं हैं ।
वो अपने ऊपर कुछ बकाया 
नहीं रखती ।
स्त्रियाँ कुछ भी ज़ाया नहीं करतीं ,
स्त्रियाँ कुछ भी ज़ाया नहीं करतीं ।।
 
रश्मि राज, नई दिल्ली 
 
 
 
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