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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Jun 2024 7:21 PM |   643 views

कचनौंदा बांध भूमि के मुआवजे वितरण में अधिकारियों ने बांध रखा है कमीशन

ललितपुर:-सिंचाई निर्माण खंड प्रथम में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। यहां पर एई एग्रीमेंट के नाम काफी फर्जीबाड़ा हो रहा है। अधिशासी अभियंता की सेवानिवृत्ति का समय नजदीक आ गया है। इसलिए वह दोनों हाथों से लूट मचाए हुए हैं। कचनौंदा बांध के मुआवजे में तो उन्होंने कुछ ऐसे लोगों को भुगतान कर दिए, जिनकी जमीन बांध डूब क्षेत्र में गई ही नहीं है।

उन्होंने मोटी रकम लेकर मुआवजे की धनराशि दी गई, कचनोंदा बांध निर्माण व भूमि अधिग्रहण की अगर गहनता से जांच हो जाए, तो इसमें करीब एक अरब से अधिक का घोटाला निकलेगा। जनपद को बांधों की नगरी का जाता है, यहां पर 14 बांध हैं, लेकिन इन बांधों से किसानों की जितनी फसलें हरी नहीं हुई है, उससे ज्यादा अधिकारियों के जेब भारी हुई है।

कचनौदा बांध परियोजना भी कुछ ऐसी ही परियोजना है, बहुजन समाज पार्टी में स्वीकृत यह योजना भाजपा शासन काल में पूर्ण नहीं हो पाई है, इसकी भूमि अधिग्रहण का मुआवजा अभी तक किसानों को दिया जा रहा है। करीब बीस वर्ष से अधिक हो चुकी इस परियोजना में प्रारंभ से ही घोटाला होना शुरू हो गया था। शासन से आई धनराशि की प्रथम किश्त अधिकारियों ने कमीशन के चक्कर में ठेकेदार को मोबाइलेजशन के लिए सौंप दी थी। जिस जमीन पर बांध बनाना था, उसका मुआवजा नहीं दिया गया, इससे बांध परियोजना प्रारंभ होने में देरी हुई, दूसरी किश्त में अधिकांश धनराशि ऐसे किसानों को सौंप दी गई, जिनकी भूमि डूब क्षेत्र में आने की संभावना थी, डेमलाइन की भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया।

जिसका किसानों ने विरोध किया, इन सभी कारणों से बांध का निर्माण देरी से होता गया, तो अधिकारियों को धन दोहन का जरीया मिलता रहा। वर्तमान में यह बांध परियोजना बनकर लगभग तैयार है, अब इसकी मलाई खाने के अधिशाषी अधिकारी सिंचाई निर्माण खंड लगे हुए हैं, सेवा निवृत्ति के नजदीक होने के कारण यह उन किसानों को ही भुगतान कर रहे हैं, जिनसे मोटी रकम मिल रही है। यही कारण है आए दिन मुआवजे को लेकर किसान आंदोलन करते हैं।

क्लोन बनाकर दे दिया मुआवजा विभागीय सूत्रों की माने में कचनौदा बांध परियोजना में कुछ ऐसे लोगों को भुगतान हुआ है, जिनकी भूमि कभी भी डूब क्षेत्र में नहीं आएगी। तो वहीं दूसरी ओर कुछ किसान जिनका अता पता नहीं है, ऐसी भूमि व ग्राम सभा की भूमि भी क्लोन बनाकर मुआवजा दिया गया है। इसमें अधिकारियों की मिली भगत रही है।

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