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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 17 Mar 2026 7:19 PM |   191 views

सम्पूर्ण भारतीय ज्ञान परम्परा की संवाहक है पालि एवं संस्कृत भाषा

गोरखपुर-राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर तथा संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत एवं पालि साहित्य का अवदान” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टण्डन ने की।
 
उन्होंने अपने उद्बोधन में राजकीय बौद्ध संग्रहालय के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए संग्रहालय के आगामी नवाचार सेमिनार पर जोर दिया तथा उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विदेशी छात्रों को जोड़ने में सहायक होगी और विदेशी छात्र यहां की भाषाओं पर अध्ययन कर सकेंगे। विकसित भारत की कल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा जैसी संगोष्ठी से ही संभव हो सकेगी।
 
मुख्य वक्ता प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र, अध्यक्ष संस्कृत विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज ने संस्कृत एवं पालि साहित्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा भारतीय ज्ञान परंपरा की पालि संरक्षिका है और संस्कृत संरक्षण प्रदान करती है। भारत की दो ही सूत्रों का मूल नासदीय सूक्त में मिलता है। संस्कृत भाषा ज्ञान- विज्ञान की भाषा है। भारतीय ज्ञान परंपरा विरासत में मिली है जो निरंतर प्रवाहित हो रही है। भारत में पुस्तकालयों के क्षरण हो जाने के बाद भी भारतीय ज्ञान परंपरा शाश्वत है। ह्यूमन हेरिटेज रजिस्टर में भगवत गीता व नाट्यशास्त्र (पंचम वेद) को रखा गया। पर्शियन जब एडमिनिस्ट्रेशन की भाषा हुई संस्कृत का क्षरण होने लगा। भारतीय ज्ञान परंपरा का उपक्रम उच्च शिक्षा के लोगों को सचेत करने के लिए है हम इसके व्याख्याकार बने यही इस उपक्रम की सार्थकता है।
 
अतिथियों का स्वागत विभाग अध्यक्ष एवं कला संकाय अधिष्ठाता प्रोफेसर कीर्ति पांडेय ने किया । विषय प्रवर्तन संगोष्ठी के संयोजक डॉक्टर देवेंद्र पाल ने किया । संचालन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने किया ।
 
डाॅ. यशवन्त सिंह राठौड, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर द्वारा संगोष्ठी की समीक्षा करते हुए अवगत कराया गया कि संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्र संचालित हुए, जिनमें 25 शोध छात्रों द्वारा शोध पत्र, 10 विशिष्ट अतिथियों के व्याख्यान, चार मुख्य अतिथियों के व्याख्यान तथा दो अध्यक्षीय उद्बोधन हुए ।
 
समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर हर्ष सिन्हा, रक्षा अध्ययन विभाग तथा अध्यक्ष के रूप में प्रोफेसर कीर्ति पांडे के वक्तव्य हुए। संचालन संगोष्ठी के सचिव डॉ. धमेन्द्र कुमार सिंह ने किया ।
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