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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Sep 2026 8:11 PM |   17 views

हिंदी सांस्कृतिक स्मृतियों और विविध अनुभवों को जोड़ने वाली भाषा है-परिचय दास

नालंदा। नव नालंदा महाविहार, सम विश्वविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत हिंदी दिवस का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात कवि प्रो. अरुण कमल ने कहा कि भाषा तभी जीवंत रहती है, जब वह समाज के जीवनानुभवों से जुड़ी रहती है। भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, अनुभवों और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। समारोह की अध्यक्षता  कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने की। हिंदी पखवाड़ा का संयोजन प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’, डीन, भाषा संकाय कर रहे हैं।
 
अपने प्रस्तावना-वक्तव्य में प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’ ने कहा कि हिंदी सांस्कृतिक स्मृतियों और विविध अनुभवों को जोड़ने वाली भाषा है। हिंदी को ज्ञान, शोध, शिक्षा और संवाद की व्यापक भाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भाषा का विकास रचनात्मकता और भाषाओं के बीच संवाद से होता है। नालंदा जैसे ज्ञान-केंद्र में हिंदी भारतीय भाषाओं और ज्ञान-परंपराओं के बीच सेतु की भूमिका निभा सकती है।
 
प्रो. अरुण कमल ने कहा कि हिंदी की शक्ति उसकी विविधता और जनजीवन से उसके गहरे संबंध में है। भाषा संवेदना और विवेक का विस्तार करती है तथा नई पीढ़ी को समाज और उसकी स्मृतियों से जोड़ती है। उन्होंने भाषाओं के बीच संवाद को आवश्यक बताते हुए कहा कि साहित्य और भाषा को समाज के बदलते यथार्थ से निरंतर संवाद करते रहना चाहिए, तभी उनकी प्रासंगिकता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि भाषा को जीवंत बनाए रखने के लिए उसे आम लोगों के अनुभवों, संघर्षों और आकांक्षाओं से लगातार जुड़े रहना होगा।
 
कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि हिंदी को भारतीय ज्ञान-परंपरा के संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। हिंदी भारतीय भाषाओं और ज्ञान-संपदा के बीच संवाद का माध्यम बन सकती है। नालंदा जैसे ज्ञान-केंद्र में हिंदी का अध्ययन केवल भाषा तक सीमित न रहकर भारतीय ज्ञान-परंपरा की व्यापक समझ का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने हिंदी के अध्ययन-अध्यापन को व्यापक बनाने पर बल दिया।
 
समारोह का संचालन अतिथि प्राध्यापक विकास सिंह ने किया। आरंभ में दीप प्रज्ज्वलन के बाद डॉ. धम्म ज्योति ने मंगल-पाठ तथा डॉ. नरेंद्र दत्त तिवारी ने स्वस्ति-वाचन किया।
 
धन्यवाद-ज्ञापन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. हरे कृष्ण तिवारी ने किया।
 
उन्होंने अतिथियों, कुलपति, वक्ताओं तथा आयोजन से जुड़े सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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