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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 19 Sep 2026 6:35 PM |   188 views

राधा का प्रेम

राधा प्रेम की साधना, राधा प्रेम का सार,

राधा चरणों में मिले, जीवन को उद्धार ।
 
राधा नाम पुकारते, खिल उठते हैं धाम,
राधा के बिन श्याम भी, हो जाते गुमनाम ।
 
बरसाने को मिल गई, आज प्रेम की छांव,
राधा जन्मी थीं जहां, धन्य हुआ वह गांव ।
 
मांगा ना कोई राज पाट, ना मांगा संसार,
राधा ने तो प्रेम को ही, माना जीवन सार ।
 
राधा केवल नाम नहीं, ये भक्ति की पहचान ,
राधा भाव जो जगे हृदय,फिर मिट जाता अभिमान ।
 
जिस उर में हो प्रेम की, निर्मल सी बरसात,
उस उर में हरपल रहे, राधा- श्याम का साथ ।
 
द्वेष मिटे, अभिमान मिटे, मिट जाए हर भेद,
राधा भाव सिखलाता है, प्रेम ही सच्चा वेद ।
 
जिसके अधरों पर राधा, उसके मन में धाम,
जिसके हृदय में प्रेम में, उसके हृदय में श्याम ।
 
राधा- राधा नाम में, शक्ति अपरम्पार,
जो राधा सुमिरन करे, भव से उतरे पार ।
 
धन और दौलत तुच्छ है, और तुच्छ सम्मान,
जिसके हृदय राधा बसे,वही सच्चा धनवान ।
 
प्रेम जहां निष्काम हो, त्याग जहां आधार,
वहीं राधा मुस्कान बन, करतीं हृदय श्रृंगार ।
 
श्याम मिले तो राधिका, राधा मिले तो श्याम,
दो तन सबको दिख रहे, पर एक ही है परिणाम ।
 
कृपा करो हे राधिका धरो ‘संजू’ सिर पर हाथ,
दोनों ‘कर’ को जोड़कर “संजू” नवाए माथ ॥
 
डॉo संजुला सिंह “संजू”
     जमशेदपुर
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