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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 24 Feb 2026 6:10 PM |   161 views

माता – पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद हो तो संसार में कुछ भी असंभव नहीं है

कुशीनगर -राष्ट्रीय सेवा योजना बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के सप्तदिवसीय विशेष शिविर के अंतिम दिन समापन समारोह के “मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी कसया डॉ संतराज सिंह बघेल ने ‘बदलते नैतिक और सामाजिक मूल्य के संदर्भ में परिवार की भूमिका'” विषय पर बोलते हुए कहा कि मै भाग्यशाली हूं कि मुझे अपने माता – पिता के साथ रहने का अवसर मिला है। हमारे अभिभावक वह धन है जिसे किसी भी सांसारिक धन से नहीं खरीदा जा सकता है। मै आज जो कुछ भी हूँ अपने माता – पिता से प्राप्त संस्कारों की देन है। आपका सुझाव था कि समय बदल रहा है लेकिन सोशल मीडिया के दौर में भी समय निकालकर अपने माता पिता के साथ बैठिए।अभी उनके पास जो अनुभव है उसे किसी भी पुस्तकालय से नहीं सीखा जा सकता है।आप जब भी अपने माता पिता के पास बैठे पुत्र बनकर बैठे न कि अधिकारी या अन्य किसी अन्यभाव के साथ बैठे।इस संसार में माता पिता के आशीर्वाद से बढ़कर कुछ भी नहीं है। माता – पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद हो तो संसार में कुछ भी असंभव नहीं है ।आप मेहनत के बल पर जो चाहे वह बन सकते हैं। इस दुनिया में तीन ही लोग है जो यह चाहते हैं कि आप उनसे बेहतर करे। वह हैं- माता, पिता और गुरु।

सोशल मीडिया के गुण को ग्रहण करें अवगुण को नहीं।आपने बताया कि दुनिया में आज तक कोई ऐसा नहीं हुआ जो अपने माता पिता का नाम रोशन करना चाहे और असफल हुआ हो।हमे अपने परिवार में अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं पर चर्चा की बजाय अपने पारिवारिक समस्याओं और जरूरतों पर चर्चा करनी चाहिए।

 
मुख्य वक्ता डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि मूल्यों के विरेचन के संदर्भ में परिवार की भूमिका पर चर्चा करनी पड़ रही है तो हमें यह समझ जाना चाहिए कि हम मूल्यों में गिरावट के दौर में जी रहे हैं। आपने सहारा श्री के जीवन के संस्मरण सुनाते हुए बताया कि परिवार की भूमिका हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है। आपने समाज की कई कहानियां सुनाकर स्वयंसेवकों को पारिवारिक मूल्यों के महत्व से परिचित कराया।आज भाइयों में एक एक इंच जमीन का बंटवारा हो रहा है।आज हम चांद पर पहुंच गए हैं सोशल मीडिया के माध्यम से देश और दुनिया से जुड़ रहे हैं किंतु सगे भाई और बहन से बोलचाल बंद है।
 
विशिष्ट अतिथि डॉ वीरेंद्र कुमार साहू ने कोहलर की नैतिक विकास सिद्धांत करते हुए बताया कि नैतिकता और मूल्यों के विकास परिवार के वातावरण से सीधे प्रभावित होते हैं। उम्र के अनुसार भी परिपक्वता के कारण नैतिक विकास होता रहता है।समाज में मूल्यों की स्थापना की सीख परिवार से ही मिलती है।इस अवसर पर उपस्थित पूर्व स्वयंसेवक कृष्ण कुमार तिवारी ने आपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सामाजिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम भाग लेकर ही मिली।
 
एन.एस. एस. स्वयंसेवक का समाज को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बौद्धिक सत्र की अध्यक्षता कर रहे पूर्व प्राचार्य प्रो अमृतांशु शुक्ल ने बताया कि एन एस एस भी एक परिवार है।माता पिता के आशीर्वाद से आप दुनिया की प्रत्येक समस्याओं का मुकाबला कर सकते हैं।आपसे मेरी गुजारिश है कि अपने कार्य व्यवहार से माता पिता को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए।
 
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई।अतिथियों का परिचय कार्यक्रम अधिकारी डॉ निगम मौर्य ने कराया जबकि विषय प्रवर्तन कार्यक्रम अधिकारी डॉ जितेंद्र मिश्र ने किया। संचालन स्वयंसेविका हर्षिता मिश्रा ने किया जबकि आभार ज्ञापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ पारस नाथ ने किया।
 
सांस्कृतिक कार्यक्रम में ममता कुमारी, हर्षिता मिश्रा, शिवानी शर्मा, शाहीन परवीन, कुसुमित गुप्ता इत्यादि ने सुंदर प्रस्तुतियां दें।
 
कार्यक्रम अधिकारी डॉ निगम मौर्य ने कैंप समापन की घोषणा की।इस कैंप में कुल 150 स्वयंसेवक प्रतिभाग कर रहे थे।
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