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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 17 Feb 2026 7:22 PM |   256 views

1857 से 1942 तक गूंजेगा गोरखपुर का गौरवशाली इतिहास, दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन

लखनऊ:दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी गोरखपुर के इतिहास विभाग और उत्तर प्रदेश स्टेट आर्काइव्स की ओर से 19 और 20 फरवरी 2026 को दो दिवसीय नेशनल सेमिनार और एग्ज़िबिशन आयोजित किया जाएगा।
 
सेमिनार का विषय “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और इतिहासलेखन (उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में)” है। इस कार्यक्रम में विद्वानों, शोधार्थियों और आम लोगों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
 
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के संस्कृति और इतिहास के संरक्षण व प्रचार-प्रसार को लेकर संवेदनशील और दूरदर्शी सोच के अनुरूप, उत्तर प्रदेश स्टेट आर्काइव्स, संस्कृति विभाग की ओर से गोरक्षा रिसर्च चेयर, गोरखपुर यूनिवर्सिटी में “गोरखपुर का इतिहास” विषय पर एक विशेष आर्काइवल एग्ज़िबिशन भी लगाई जा रही है।
 
इस प्रदर्शनी में कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें गुरु गोरखनाथ से जुड़ी पांडुलिपियों (मैन्युस्क्रिप्ट) की तस्वीरें शामिल हैं। साथ ही 1857 की पहली आज़ादी की लड़ाई से जुड़ी गोरखपुर की कहानियां, क्रांतिकारी बंधु सिंह का विस्तृत और चित्र सहित विवरण, गोरखपुर क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों की सूची भी प्रदर्शित की जाएगी।
 
प्रदर्शनी (एग्ज़िबिशन) में चौरी-चौरा कांड से संबंधित आर्काइवल सामग्री भी दिखाई जाएगी। इसके अलावा काकोरी कांड के क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी की तारीखों और उनसे जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। गोरखपुर जेल से जुड़े रिकॉर्ड भी प्रदर्शित किए जाएंगे, जहां महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी दी गई थी। इसके साथ ही 1942 के आंदोलन के दौरान देवरिया कचहरी में राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले क्रांतिकारी रामचंद्र विद्यार्थी और सोना सुनार से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे।इसके अलावा गोरखपुर की ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों से जुड़ी सामग्री और “वंदे मातरम” के इतिहास से जुड़े दस्तावेज भी शामिल किए जाएंगे।
 
इसपर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह एग्ज़िबिशन शोधार्थियों, छात्रों और आम नागरिकों को गोरखपुर की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराएगी। इससे लोगों को इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी अहम भूमिका को और बेहतर ढंग से समझने का मौका मिलेगा।
 
जंग-ए-आजादी के इतिहास में गोरखपुर का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। इस धरती के लोगों ने 1857 की पहली क्रांति से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक हर मोर्चे पर देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। तरकुलहा देवी मंदिर आज भी 1857 की क्रांति के अमर शहीद बंधु सिंह की वीरता की गाथाएं सुनाता है। वहीं चौरी-चौरा शहीद स्थल से जुड़ी ऐतिहासिक घटना ने स्वतंत्रता संग्राम की दिशा ही बदल दी थी और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गोरखपुर के डोहरिया कलां में स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ी और देश के लिए शहीद हो गए।
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