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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 8 Feb 2026 7:50 PM |   301 views

कुषाण शासकों ने भी प्रारम्भ में स्मृति सिक्के जारी किये

गोरखपुर – राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में “प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं अभिरुचि कार्यशाला” के अन्तर्गत आज प्रो० प्रशान्त श्रीवास्तव, आचार्य प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा “प्राचीन भारत में स्मारक सिक्के” विषय पर विस्तृत सूचना प्रतिभागियों को उपलब्ध करायी गयी।
 
प्रो० प्रशांत श्रीवास्तव द्वारा भारत में स्मारक सिक्कों का प्रचलन इण्डो-ग्रीक राजाओं के शासनकाल से बताया गया। यह स्मारक सिक्के प्रमुख घटनाओं, पूर्वजों एवं पूर्व शासकों के स्मृति में जारी हुए थे। डायोडोटस की स्मृति में जारी सिक्कों को प्रथम स्मृति सिक्का स्वीकार किया जाता है।
 
आगाथोक्लिज ने 06 राजाओं की स्मृति में सिक्के जारी किये थे। सिकन्दर के समय से सिर पर राजतत्व का प्रतीक डायडन या फीता बांधने की परम्परा सिक्कों से ही ज्ञात होती है। सूर्य देव के ग्रीक स्वरूप हेलियोस का अंकन प्लेटो के सिक्कों पर मिलता है। कुषाण शासकों ने भी प्रारम्भ में स्मृति सिक्के जारी किये, जिसमें कुजुल कदफिसस के सिक्के उल्लेखनीय हैं। गुप्त शासकों में कुमारदेवी प्रकार सिक्का एवं समुद्रगुप्त के अश्वमेध प्रकार सिक्का को स्मृति सिक्का स्वीकार किया जा सकता है। गुप्त कालीन काच प्रकार सिक्का एवं कुमार गुप्त प्रथम के अप्रतिघ प्रकार सिक्के को भी स्मृति स्वरूप जारी किये गए सिक्कों के श्रेणी में कुछ विद्वानों द्वारा स्वीकार किया गया है।
 
व्याख्यान के पश्चात् प्रो० राजवन्त राव के निर्देशन में सभी प्रतिभागियों को संग्रहालय की सात वीथिकाओं का शैक्षिक भ्रमण कराया गया, जिसमें प्रतिभागी मथुरा एवं गांधार प्रकार की बौद्ध प्रतिमाओं तथा विभिन्न प्रकार की जैन एवं वैष्णव प्रतिमाओं से अवगत हुए। प्रो० राजवन्त राव द्वारा वीथिका में प्रदर्शित मृणमूर्तिकला के उत्कृष्ट स्वरूपों से सभी प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।
 
कार्यशाला संयोजक के रूप में डॉ० यशवन्त सिंह राठौर ने सभी प्रतिभागियों को अवगत कराया कि कार्यशाला का अन्तिम सप्त दिवसीय व्याख्यान 09 फरवरी , 2026 को प्रातः 10 बजे यशोधारा सभागर में प्रारम्भ होगा। कार्यशाला का समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम समय पूर्वान्ह 11:30 बजे सम्पन्न होगा।
 
अंत में प्रो० प्रज्ञा चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, दी०द० उ० गो० वि०वि०, गोरखपुर द्वारा अपनी जिज्ञासओं को व्यक्त करते हुए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
 
कार्यशाला के छठे व्याख्यान दिवस में लगभग 74 प्रतिभागियों सहित कार्यालय के कार्मिक भी उपस्थित रहें।
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