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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 12 Jul 2025 7:57 PM |   575 views

खुले विद्यालय तो पिंकी ने भी शुरू की कालाजार पाठशाला

देवरिया-गर्मियों की छुट्टी के बाद खुले विद्यालय तो कालाजार चैम्पियन पिंकी चौहान ने कालाजार उन्मूलन में चला जागरूकता मुहीम को तेज कर दिया है। जुलाई माह में खुले विद्यालय तो  पिंकी ने भी अपनी पाठशाला शुरू कर दी है। पिंकी आजकल नए नाम से जानी जाती है। साइकिल वाली दीदी, जिसकी पाठशाला कहीं भी शुरू हो जाती है। अपने उस दर्द की याद को ताजा करती है, जो कालाजार बीमारी से पीड़ित होने के दौरान उसने झेला था उस आप बीती को सुनाकर विद्यालय के बच्चों को बीमारी की गंभीरता से अवगत कराती हैं। बचाव व इलाज के प्रति जागरूक करती हैं।
 
जिले का बनकटा ब्लॉक जहां कुछ गांव कालाजार जैसी बीमारी से प्रभावित रहते हैं। इस ब्लॉक की नियरवा गांव निवासी कालाजार चैम्पियन (नेटवर्क सदस्य) पिंकी पिछले 4 वर्षों से कालाजार उन्मूलन में अपनी सहभागिता निभाते हुए नियरवा व आस-पास के गांवों और विद्यालयों में जागरूकता मुहीम चला रही हैं।  कालाजार से पीड़ित पिंकी ने जिस दर्द को सहा था, अब उसे लोगों के बीच ले जा रही हैं। उन्हें एहतियात बरतने की सलाह देती हैं। पिंकी की पाठशाला हर जगह चलती है। लोगों के बीच जागरूकता फैला रही पिंकी अब साइकिल वाली दीदी के रूप में भी जानी जाने लगी है।
 
पिंकी  कालाजार रोग को हराने की मुहिम में जुटी हैं।  पिंकी अपनी पाठशाला में ब्लैक बोर्ड पर  कालाजार फैलाने वाली बालू मख्खी चित्र बनाकर विद्यालय के बच्चों को इस रोग के बारे में बताती हैं। पिंकी कालाजार सर्वाइवर हैं। वर्ष 2015 में जब वह 12 साल की थी, तब उन्हें कालाजार हुआ था। वह अभी तक उस दर्द को भुला नहीं पाई हैं।
 
पिंकी को जब कालाजार हुआ तो वह इस रोग को मात देने में सफल रही। लेकिन एक साल बाद कालाजार का दोबारा अटैक हुआ। पोस्ट कालाजार इंफेक्शन ने उनकी त्वचा को प्रभावित किया। उन दिनों को याद कर आज भी पिंकी सिहर उठती है। उनके अभियान को उनके माता-पिता का भी सहयोग मिला हुआ है।
 
 आईआरएस छिड़काव में भी करती हैं सहयोग- 
 
जिला मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने बताया कि बनकटा ब्लॉक के 8 गांव कालाजार प्रभावित है। पिंकी चौहान पिछले  4 वर्षों से कालाजार जागरूकता मुहीम चला रहीं हैं। समुदाय के लोगों और विद्यालयों के बच्चों को बीमारी के प्रति जागरूक करती हैं। इसके साथ ही कालाजार से बचाव के लिए हर वर्ष चलाये जा रहे आईआरएस छिड़काव में भी गांव के लोगों को छिड़काव के लिए जागरूक कर छिड़काव टीम का सहयोग करती हैं।
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