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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 14 Apr 2025 5:38 PM |   945 views

‘‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान‘‘ विषयक परिचर्चा एवं डाॅ0 अम्बेडकर की जीवन-यात्रा विषयक छायाचित्र/अभिलेख प्रदर्शनी का आयोजन किया गया

 
गोरखपुर-भारत रत्न, बोधिसत्व, संविधान निर्माता, राष्ट्र निर्माता, मानवता के मसीहा, शोषितों वंचितो एवं महिलाओं के मुक्तिदाता परमपूज्य बाबा साहब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर की 134वीं जयन्ती के अवसर पर आज राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में बड़े ही धूम-धाम से मनाई गयी।
 
इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. रामनरेश चौधरी, पूर्व संकायाध्यक्ष, विधि संकाय, दी0द0उ0गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं बाबा साहब के तस्वीर पर पुष्पांजलि के साथ किया गया।
 
उक्त अवसर पर संग्रहालय द्वारा विविध कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिसमें ‘‘डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर की जीवन यात्रा विषयक छायाचित्र/अभिलेख प्रदर्शनी एवं ‘‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान‘‘, विषयक एक संगोष्ठी/परिचर्चा प्रमुख रही।
 
तत्पश्चात डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर जी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम लोकगीत की प्रस्तुति  गजेन्द्र सिंह बेनीवाल, लोक गायक द्वारा उल्लेखनीय रहीं। जिन्होंने सभी श्रोतओं का मन मोह लिया।
 
कार्यक्रम का संचालन रीता श्रीवास्तव, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन कलाकार, गोरखपुर द्वारा किया गया। 
 
राजकीय अभिलेखागार के सौजन्य से बाबा साहेब के जीवन यात्रा से सम्बन्धित उपलब्ध कराये ऐतिहासिक एवं दुर्लभ छायाचित्रों/अभिलेखों की लगायी गयी, जिसके माध्यम से भारत रत्न डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को विस्तृत रूप से दर्शाया गया है। जिसमें उनके सम्बन्ध में अनछुए पहलुओं को भी दिखाया गया है।
 
प्रदर्शनी में उनके द्वारा सम्पादित समाचार-पत्रों जैसे बहिष्कृत भारत, मूक नायक की प्रतियों के साथ साथ दुर्लभ छायाचित्रों एवं घटनाओं जैसे महिला आन्दोलन,  संविधान निर्माण की प्रारूप समिति के साथ में डाॅ0 अम्बेडकर, नागपुर में 14 अक्टूबर, 1956 को अपने लाखों अनुयाइयों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा लेते हुए, संत गाडगे महाराज के साथ में, दिसम्बर, 1931 में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेते हुए, सेंट जेम्स पैलेस आदि अनेक दुर्लभ चित्रों के माध्यम से दिखाये जाने की कोशिश की गयी है। 
 
मुख्य अतिथि विधि वेत्ता एवं प्रो. रामनरेश चौधरी ने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के उपरान्त निर्धारित विषय-वस्तु पर अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए और कहा कि बाबा साहेब एक सच्चे देशभक्त थे, जिन्होंने देश के हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। आज का आधुनिक भारत बाबा साहब के प्रयासों का ही भारत है।
 
डाॅ0 अम्बेडकर ने संविधान में अछूतोद्धार एवं सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक विषमता को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किये और सफल भी रहे। बाबा साहब का संदेश था कि शिक्षा से ही समाज में समानता लायी जा सकती है, जब मनुष्य शिक्षित हो जाता है, तब उसमें विवेक और सोचने की शक्ति पैदा हो जाती है। नारी वर्ग के उद्धारक, सिंबल ऑफ नॉलेज, सामाजिक एवं शैक्षिक क्रान्ति के अग्रदूत, युगदृष्टा एवं बीसवीं सदी के शिल्पकार, शोषित-उपेक्षित सर्वहारा समाज के मसीहा, महान विधिवेत्ता, शिक्षाविद, बौद्ध धर्म के उद्धारक, स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री, विश्वभूषण, बोधिसत्व भारत रत्न बाबा साहेब डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर को शत-शत नमन है। 
 
विशिष्ट वक्ता प्रो. अनिल यादव ने कहा कि बाबा साहेब के अथक प्रयासों से संविधान का निर्माण किया गया। जो विश्व में अद्वितीय है। संविधान के माध्यम से बाबा साहब ने वंचितों, मजदूरों एवं महिलाओं सहित युवाओं एवं पूरे देश के हित को ध्यान में रखकर तैयार किया है।
 
भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके बहुमूल्य योगदान योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। हमारा संविधान जब तक सुरक्षित है तब तक हमारा स्वाभिमान भी सुरक्षित है। इसलिए हम सबका व्यक्तिगत भी उत्तरदायित्व है कि अपने संविधान की रक्षा करें। इसी कड़ी में श्रद्धेय परदेशी बौद्ध ने बाबा साहब के द्वारा बचपन से अखिरी तक उनके जीवन संघर्षों एवं वंचित समाज के उत्थान के किये किये गये प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा एडवोकेट यशवन्त भारती ने संविधान के निर्माण की पूरी प्रक्रिया में बाबा साहब के योगदान पर विस्तार से जानकारी दी।
 
संग्रहालय के उप निदेशक डाॅ0 यशवन्त सिंह राठौर ने कहा बाबा साहेब ने शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा वर शेरनी का दूध है, जो पीता है, वह दहाड़ता है। इसी संदेश की पूर्ति हेतु उन्होंने संविधान में सबके लिए शिक्षा के दरवाजे खोले। यही कारण है कि उनके द्वारा बनाया गया संविधान आगे बढ़ने में प्रेरणा स्रोत बना हुआ है और जिसके कारण भारतीय जनसामान्य में आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में निरन्तर बदलाव आ रहा है। आज संग्रहालय के 39वें स्थापना दिवस 04 मई पर आयोजित होने वाली आजमगढ़ (निजामाबाद) की टेराकोटा कला की सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला (दिनांक 04-10 मई, 2025) के पंजीयन हेतु पोस्टर भी लांच किया गया। पंजीयन की अन्तिम तिथि 01 मई, 2025 होगी।
 
उक्त अवसर पर पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन से  प्रदीप कुमार, वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी एवं अनिरूद्ध कुमार, सहायक कार्मिक अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे सहित डाॅ0 जितेन्द्र कुमार, अमरपाल यादव, एड0 नटवरलाल विनय कुमार गौतम, अर्चना राय, सौरभ सिंह, अर्चना राय, आशीष पासवान, अमरजीत, मन्तोष कुमार प्रजापति, मेजर राजू, विवके कुमार आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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