फसल अवशेष जलाने के दुष्परिणामों के प्रति किसानों को जागरूक करेगा प्रचार वाहन
देवरिया- फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक करने तथा पराली जलाने से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर से प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान ‘प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू’ योजना के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।प्रचार वाहन 02 नवंबर से 16 नवंबर 2026 तक जनपद के सभी विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर किसानों को फसल अवशेष न जलाने के प्रति जागरूक करेगा। इस दौरान किसानों को पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव, खेतों में मौजूद लाभकारी मित्र कीटों एवं सूक्ष्मजीवों के नष्ट होने तथा पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने कृषकों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को खेतों में न जलाएं, बल्कि उनका उचित प्रबंधन करें। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और कृषि के लिए उपयोगी मित्र कीट एवं लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही कृषि उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ से कम क्षेत्रफल वाले किसानों पर प्रति घटना 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक के किसानों पर 10,000 रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले किसानों पर 30,000 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क निर्धारित है।
उन्होंने किसानों से इन दंडात्मक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
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