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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 7 Jan 2025 5:25 PM |   462 views

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पंचायती राज संस्थाओं की अनुसूचित जनजाति की महिला प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की

पंचायती राज संस्थाओं की अनुसूचित जनजाति की महिला प्रतिनिधियों के एक समूह ने आज (6 जनवरी, 2025) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केन्द्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।

जनजातीय कार्य मंत्रालय और लोकसभा सचिवालय के सहयोग से राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘पंचायत से संसद’ पहल के तहत यह समूह दिल्ली में है।

राष्ट्रपति ने समूह को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाएं हमारे लोकतंत्र की आधारशिला रही हैं। वे जमीनी स्तर पर शासन और सामुदायिक विकास के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। इन संस्थाओं ने महिलाओं के सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि देश भर में लगभग 14 लाख महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों में निर्वाचित सदस्य के रूप में काम कर रही हैं, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 46 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इस भागीदारी को और मजबूत करने के लिए, अधिकांश राज्यों ने आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार देश और उसके नागरिकों के समग्र विकास के लिए काम कर रही है। नागरिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे पात्र लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक करें ताकि वे लाभार्थी बन सकें। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चों का समय पर टीकाकरण हो, गर्भवती महिलाओं को उचित पोषण मिले और बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़ें।

उन्होंने कहा कि वे दहेज, घरेलू हिंसा और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाएं।राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार देश और उसके नागरिकों के समग्र विकास के लिए काम कर रही है। नागरिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे पात्र लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक करें ताकि वे लाभार्थी बन सकें। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चों का समय पर टीकाकरण हो, गर्भवती महिलाओं को उचित पोषण मिले और बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़ें। उन्होंने कहा कि वे दहेज, घरेलू हिंसा और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाएं।

राष्ट्रपति ने महिला प्रतिनिधियों को पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्भीक होकर निर्वाह करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में उन्हें ग्रामीणों के आपसी विवादों को सुलझाने का अधिकार है। उन्हें इस अधिकार का समुचित उपयोग करना चाहिए और ग्रामीणों के बीच विवादों को पंचायत स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। इससे न केवल लोगों के संसाधनों और समय की बचत होगी बल्कि आपसी सौहार्द भी बढ़ेगा।

 

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