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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 24 Aug 2024 5:20 PM |   608 views

भारत सरकार की तरफ से 156 से ज्यादा दवाओं पर लगाया गया बैन

केंद्र ने बुखार, दर्द, सर्दी और एलर्जी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 156 व्यापक रूप से बिकने वाली फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, उनका कहना है कि इनसे “मनुष्यों को जोखिम होने की संभावना है”। FDC दवाएं वे हैं जिनमें एक निश्चित अनुपात में दो या अधिक सक्रिय दवा सामग्री का संयोजन होता है और इन्हें “कॉकटेल” दवाएं भी कहा जाता है।

यह निर्णय एक विशेषज्ञ समिति और शीर्ष पैनल, ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) द्वारा यह पाए जाने के बाद लिया गया कि जीवाणुरोधी दवाओं सहित इन संयोजनों में चिकित्सीय औचित्य का अभाव है और ये मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करते हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 12 अगस्त को जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, प्रतिबंधित दवाओं में लोकप्रिय संयोजन जैसे ‘एसेक्लोफेनाक 50mg + पैरासिटामोल 125mg टैबलेट’, मेफेनामिक एसिड + पैरासिटामोल इंजेक्शन, सेटिरिज़िन एचसीएल + पैरासिटामोल + फेनिलफ्रीन एचसीएल, लेवोसेटिरिज़िन + फेनिलफ्रीन एचसीएल + पैरासिटामोल, पैरासिटामोल + क्लोरफेनिरामाइन मैलेट + फेनिल प्रोपेनोलामाइन और कैमिलोफिन डाइहाइड्रोक्लोराइड 25 mg + पैरासिटामोल 300mg शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, पैरासिटामोल, ट्रामाडोल, टॉरिन और कैफीन के संयोजन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है, क्योंकि ट्रामाडोल एक ओपिओइड-आधारित दर्द निवारक है।

प्रतिबंध औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26A के तहत जारी किया गया था, जो सरकार को हानिकारक या अनावश्यक समझी जाने वाली दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। डीटीएबी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह के विनियमन या प्रतिबंध से मरीजों में इन एफडीसी के इस्तेमाल को उचित नहीं ठहराया जा सकता, जिसके कारण जन स्वास्थ्य के हित में इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।

अधिसूचना में कहा गया है, “केंद्र सरकार इस बात से संतुष्ट है कि फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवा के इस्तेमाल से मानव को जोखिम होने की संभावना है, जबकि उक्त दवा के सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।”

इसमें कहा गया है कि मामले की जांच केंद्र द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने की थी, जिसने इन एफडीसी को “अतार्किक” माना था। इसमें आगे कहा गया है कि डीटीएबी ने भी इन एफडीसी की जांच की और सिफारिश की कि “इन एफडीसी में निहित अवयवों के लिए कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है”।

अधिसूचना में कहा गया है, “एफडीसी से मानव को जोखिम हो सकता है। इसलिए, व्यापक जनहित में, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 26 ए के तहत इस एफडीसी के निर्माण, बिक्री या वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है।”

इसमें कहा गया “उपर्युक्त के मद्देनजर, रोगियों में किसी भी तरह के उपयोग की अनुमति देने के लिए किसी भी तरह का विनियमन या प्रतिबंध उचित नहीं है। इसलिए, केवल धारा 26ए के तहत प्रतिबंध की सिफारिश की जाती है। डीटीएबी की सिफारिशों के बाद, अधिसूचना में कहा गया है कि “केंद्र सरकार इस बात से संतुष्ट है कि देश में मानव उपयोग के लिए उक्त दवा के निर्माण, बिक्री और वितरण को प्रतिबंधित करना जनहित में आवश्यक और समीचीन है”। सूची में कुछ ऐसे उत्पाद शामिल हैं जिन्हें कई दवा निर्माताओं ने पहले ही बंद कर दिया था।

2016 में, केंद्र ने 344 दवा संयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जब एक विशेषज्ञ पैनल ने पाया कि उन्हें वैज्ञानिक डेटा के बिना बेचा जा रहा था। प्रतिबंध को निर्माताओं ने अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन बाद में डीटीएबी ने सिफारिश की कि उनमें से 328 संयोजन “तर्कहीन” थे और उन्हें प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। पिछले साल जून में, मूल सूची से 14 एफडीसी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और हाल ही में प्रतिबंधित कई दवाएं भी मूल सूची का हिस्सा थीं।

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