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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 11 Feb 2023 6:22 PM |   867 views

पोषक तत्वों का खजाना है मोटे अनाज

प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की गवर्निंग बॉडी के सदस्य प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद ने  कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया का भ्रमण किया। इस अवसर पर केंद्र  पर कृषक वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते मुख्य अतिथि प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद ने  किसानों को मोटे अनाज की खेती पर बल देने एवं मोटे अनाज की पौष्टिकता के बारे में विस्तार  से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इनमें आयरन, जिंक, कैलशियम, फास्फोरस, पोटेशियम, कॉपर जैसे पोषक तत्व के साथ-साथ विटामिन बी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इनके उपयोग से आप स्वस्थ एवं निरोगी रहेंगे।

उन्होंने किसानों को भारतीय प्राकृतिक कृषि अपनाने की सलाह दी। इसके पूर्व  उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा किसानों के प्रक्षेत्र पर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की किसानों से विस्तृत में जानकारी ली।

केंद्र के प्रभारी डॉ रजनीश श्रीवास्तव ने कृषि विज्ञान केंद्र पर चल रहे तमाम गतिविधियों के बारे में अवगत कराते हुए कहा कि  किसानों को धान गेहूं उत्पादन  के साथ-साथ समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर सब्जी उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन प्राकृतिक खेती आदि को भी शामिल करें। 

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ कमलेश मीणा किसानों को वर्ष भर प्लानिंग के तहत खेती करने जिसमें दलहन तिलहन एवं मोटे अनाज को शामिल करने की किसानों को सलाह दी।

उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल एवं मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खेती की योजना बनाना अति आवश्यक हैं, ताकि जल संरक्षण करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को भी खेती के लिए पानी उपलब्ध होगा।

इस दौरान मुख्य अतिथि द्वारा केंद्र पर भारत सरकार द्वारा चलाये जा  रहे अनुसूचित जाति – जनजाति कार्यक्रम के तहत अनुसूचित जाति के किसानों को हसिया, कुदाल, सब्जियों के नर्सरी, पपीता  के पौधे एवं कैरेट वितरण की गई।

कार्यक्रम के अंत में अजय तिवारी प्रक्षेत्र  प्रबंधक द्वारा सभी आगंतुकों आगंतुकों का धन्यवाद किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से चंद्रदेव, ओमप्रकाश मौर्य, अवधेश, डॉ घनश्याम शुक्ला, सुरेंद्र सिंह, कंचन लता, ममता देवी, वशिष्ट मिश्र प्रभास्कर नारायण तिवारी के साथ-साथ 50 से ज्यादा कृषक एवं कृषक महिलाएं उपस्थित रहे।

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