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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 Sep 5:58 PM |   123 views

विश्व फेफड़ा दिवस

आज भारत में 17 लाख लोग फेफड़ा रोग से पीडित होकर अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं |फेफड़ा रोग मुख्यतया वायु प्रदूषण से होता है |दुनिया की सर्वाधिक प्रदूषित राजधानियों में दिल्ली प्रथम स्थान पर है| दिल्ली की सीमा से सटे पंजाब , हरियाणा व उत्तर प्रदेश में किसान पराली जलाकर प्रदुषण को बढ़ावा दे रहें है | भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश का औधोगिक शहर कानपुर में दिवाली के अवसर पर करोडो रूपए के पटाखे छोड़े जातें हैं |यातायात की अव्यवस्था के कारण सड़क पर रेगतें वाहन वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहें हैं | रसोईघर घर से निकलने वाला धुँआ हमारे व हमारे परिवारजनों के लिए धीमा जहर है | शहरीकरण के कारण वृक्षों के कटान वायुमंडल में कार्बन डाईआक्साइड की मात्रा में इजाफा कर रहा है |धूम्रपान से बहुत से लोगो के फेफड़े रोग ग्रस्त हो रहें है |आज जनजागरुकता की कमी के कारण फेफड़ा रोगियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है |

लोगो को फेफड़ा रोग से बचाने के लिए निमित्त विश्व स्वास्थ्य संगठन ( who ) व फोरम ऑफ रेस्पिरेटरी सोसाइटी द्वारा प्रतिवर्ष 25 सितम्बर को ” विश्व फेफड़ा दिवस “मनाया जाता है |इस वर्ष का थीम है “Lungs Health for all “यानि सबके फेफड़े का स्वास्थ्य ठीक रहें |  विश्व फेफड़ा दिवस मनाये जाने का उद्देश्य लोगो को अपने फेफड़े के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है | टी.वी. ,अस्थमा ,निमोनिया ,सी.ओ.बी.डी.तथा फेफड़े के कैंसर ये पांच प्रमुख श्वसन रोग हैं |

फेफड़ा रोग से बचाव हेतु मास्क का प्रयोग और धूम्रपान से दूर रहने की सलाह दी जाती है |यदि किसी व्यक्ति को फेफड़ो का संक्रमण है तो खासतें समय रुमाल का प्रयोग करना चाहिए |दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने पर जांच आवश्यक है |एलर्जी की शिकायत होने पर धूल , धुँआ से बचाव करना चाहिए | स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए जहा हरियाली हो | पेड़ – पौधों के प्रति लगाव होने चाहिए जिससे कि हमे शुद्ध वायु मिल सके | सुबह में तीव्र गति से सांस लेने और छोड़ने से फेफड़ो को शुद्ध oxigen मिलती है | फेफड़ो के स्वास्थ्य के लिए जन जागरूकता बढ़ाने हेतु समय – समय पर स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन होते रहना चाहिए |

-मनोज ” मैथिल

  

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