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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 28 May 4:59 PM |   980 views

मौसम विभाग का पूर्वानुमान खरा उतरा

 
बलिया -यास तूफान मानसून के आगमन को प्रभावित कर रहा है। यह असर कितना होगा? और कब तक होगा? इस पर लगातार निगरानी हो रही है। सीएसए के मौसम विभाग  की मानें तो इस साल होने वाली मानसून की बारिश पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। वह वैसी ही होगी, जैसी पूर्व में संभावना जताई गई है। कुल मिलाकर यास तूफान मानसून की गति पर असर डालेगा, बारिश पर नहीं।
 
मानसून के आगमन से ठीक पहले आया यास तूफान , गौरतलब है कि मौसम विभाग ने केरल में मानसून की दस्तक एक जून को बताई है, जबकि स्काईमेट वेदर ने 31 मई की संभावना जताई है। अंडमान निकोबार में मानसून आ भी गया है। लेकिन यास के प्रभाव से दक्षिणी- पश्चिमी मानसून की दस्तक प्रभावित होती जा रही है। दरअसल, प्रभाव तो ताउते का भी पड़ सकता था किन्तु ताउते और मानसून की दस्तक के बीच लगभग 12 दिन का अंतराल था। इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ा। जबकि यास तब आया है जब मानसून का आगमन भी होने ही वाला है। मौसम विभाग के अनुसार  28 मई का अधिकतम तापमान  27.0 (डिग्री०से०) रहा जो समान्य तापमान से  13.0 डिग्री से. कम रहा    न्यूनतम तापमान 24.0 डिग्री०से० रहा जो  सामान्य से कम है। 
 
आगामी 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम से घने बादल छाए रहने एवं हल्की बर्षा होने की संभावना है। हवा सामान्य गति से पूर्वी चलने एवं औसत तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है। 28 -29 मई के मध्य हल्की से तेज बर्षा हो सकती है। 30 मई को फुहार, 31 मई को छिटपुट बर्षा की संभावना है। 1  जून से मौसम साफ हो सकता है।
 
आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविधालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि पूर्वांच्चल में प्रचलित कहावतें भी कुछ चरितार्थ हो रही है । जैसे –
तपे जेठ में जो चुई जाय 
 सभी नक्षत्र हलके परि जाय
 
अथार्त  तपती जेठ माह मे यदि थोड़ा भी पानी बरस जाय तो सभी नक्षत्रों के पानी से वह श्रेष्ठ होगा।
 
जेठ मास जो तपे निराशा 
तो जानो बरसा की आशा
उतरे जेठ जो बोले दादर
कहे भड्डरी बरसे बादर
रोहिणी बरसे मृग तपे
कुछ कुछ आद्रा होय
घाघ कहे सुन घाघनी 
स्वान भात नही खाय
 
अथार्त  रोहिणी नक्षत्र अथार्त  मई माह के अंत में  बर्षा हो जाये  , और धान की बुआई कर दिया जाये  तथा मृगशिरा नक्षत्र म़े  यानि जून के तीसरे चौथे  सप्ताह में पानी न बरसे  और 2-4 दिन आद्रा मे भी  न बरसे पानी,  धान एक दफे सुखने लगे  और फिर बरसात हो जाय तो घाघ अपनी स्त्री से कहते है  कि  धान की फसल बहुत अच्छी होगी कि कुत्ते भी भात नही खायेगे। यह बरसात अगामी खरीफ फसलों के लिये  काफी लाभ दायक होगा।
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