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By : Bhola Prasad | Published Date : 10 Jan 9:58 AM

आई लव यू हिंदी

आज सुबह एक मित्र ने मुझसे कहा कि ” अब हिंदी का क्रेज वर्ल्ड लेवल पर बढ़ रहा है। इसीलिए अब हर साल दस जनवरी को वर्ल्ड हिंदी डे मनाया जाएगा और हिंदी का वेलकम किया जाएगा।”उनकी बात सुनते हुए लग रहा था जैसे कोई मेरे सिर पर जूतों से मार रहा हो और हिंदी को भद्दी से भद्दी गालियां दे रहा हो। मैंने उसे चुप कराते हुए पूछा कि” तुम्हारी सन्तानें कितनी है ?
  उसने बताया कि”दो लड़के और एक लड़की।”
    “तीनों किस कक्षा में पढ़ते है?”
    “बड़ा बेटा नाइन्थ में,छोटा फिफ्थ में और बेटी के०जी०मे।”
    ” विद्यालय कौन सा है?”
    ” सेन्ट अलेक्जेंडर इंग्लिश स्कूल ।”
    “तब तुम्हें हिंदी से क्या है लेना देना ?”
    ” क्यों, ऐसा क्यों कह रहे हो? आई लव यू हिंदी।”
    “यह संवाद चल चित्र के नायक नायिका का है ।”
    “क्या?”
    “हां यही कि आई लव यू वाक्य से अंग्रेजियत और वासना की दुर्गंध आती है।”
    “तुम्हारे कहने का मतलब क्या है?
जब हिन्दी को अपने देश में यथोचित मान सम्मान नहीं दिला सके, उसे राष्ट्र भाषा नहीं बना सके तो विश्व स्तर पर क्या कर लोगे? और इतना ही नहीं विश्व कीअन्य किसी भाषा का दिवस नहीं मनाया जाता। केवल हिन्दी का ही अब तक राष्ट्र स्तर पर चौदह सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता रहा। जब देखा कि केवल देश में मनाने से हिंदी का काम तमाम नहीं हो सका तो अब विश्व स्तर पर मनाना शुरू किया गया है ताकि केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व से हिंदी गायब हो जाए।
जब तुम अपने बच्चों को कक्षा नौ, पांच और शिशु मे नहीं पढ़ा कर नाइन्थ, फिफ्थ और के० जी ० में पढ़ा रहे हो , विद्यालय भी हिंदी माध्यम का न हो कर अंग्रेजी माध्यम का ही है । अब तुम स्वयं सोचो कि हिंदी का कल्याण कर रहे हो या विनाश कर रहे हो। तुम्हारे हर वाक्य में लगभग पचहत्तर प्रतिशत शब्द अंग्रेजी के ही हैं।
क्या करे मित्र समय के अनुसार चलना पड़ता है, लेकिन तुम्हारे कहने का मतलब क्या है?
यही कि तुम लोग हिंदी को अंग्रेजियत के कफ़न में लपेट कर विश्व हिंदी दिवस के कब्र में दफ़न करने जा रहे हो।
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