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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Dec 2020 5:50 PM |   644 views

8 दिसंबर को भारत बंद,कांग्रेस का समर्थन किसानों को मिला

नयी दिल्ली- केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संघों द्वारा आठ दिसंबर को आहूत भारत बंद ’ के प्रति कांग्रेस  ने रविवार को पूरा समर्थन जताया और घोषणा की कि इस दिन वह किसानों की मांगों के समर्थन में सभी जिला एवं राज्य मुख्यालयों में प्रदर्शन करेगी। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर 26 नवंबर से डटे हजारों किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि आठ दिसंबर को पूरी ताकत के साथ ‘भारत बंद’ किया जाएगा। यहां कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मैं यहां घोषणा करना चाहता हूं कि कांग्रेस आठ दिसंबर को होने वाले भारत बंद को पूरा समर्थन देती है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ट्रैक्टर रैलियों, हस्ताक्षर अभियानों और किसान रैलियों के जरिए किसानों के पक्ष में पार्टी की आवाज बुलंद कर रहे हैं। खेड़ा ने कहा, ‘‘हमारे सभी जिला मुख्यालय एवं प्रदेश मुख्यालयों के कार्यकर्ता इस बंद में हिस्सा लेंगे। वे प्रदर्शन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि बंद सफल रहे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सारी दुनिया हमारे किसानों की दयनीय अवस्था देख रही है। पूरा विश्व यह भयावह मंजर देख रहा है कि किसान जाड़े की रातों में राजधानी के बाहर बैठे इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार उनकी बात सुन ले।

कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा कि सरकार को कानूनों को लागू करने की इतनी जल्दी क्या थी। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कोविड-19 महामारी के बीच, जून में सरकार चोरी छिपे अध्यादेश ले आई। इतनी जल्दी किस बात की थी। जब पूरे देश का ध्यान कोविड-19 के आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर था तब सरकार अपने उद्योगपति-कॉर्पोरेट मित्रों की मदद करने के लिए चोरी-छिपे अध्यादेश लाने में व्यस्त थी।

खेड़ा ने कहा कि सरकार ने किसानों को भरोसे में नहीं लिया और अब किसानों के हितों की आड़ में छिप रही है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपको वाकई में किसानों के हितों की चिंता होती तो आपने इन विधेयकों को लाने से पहले उनकी सलाह ली होती।

 खेड़ा ने आगे कहा, ‘‘जो कुछ भी आज देखने को मिल रहा है वह सरकार और उसके कॉर्पोरेट मित्रों के बीच की साजिश का नतीजा है जिसमें पीड़ित किसान ही होगा और किसान इस बात को जानता है। शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच वार्ता बेनतीजा रही। पांच चरणों की बातचीत हो चुकी है तथा अगली बैठक केंद्र ने नौ दिसंबर को बुलाई है।

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