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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 24 Aug 3:49 PM |   2379 views

रबी ( ठंड के मौसम) सीजन की सब्जियां

 
पत्ते वाली सब्जियां-
पालक-बुवाई द्वारा
सरसो-बुवाई द्वारा
मेथी-बुवाई द्वारा
धनिया-बुवाई द्वारा
बथुआ-बुवाई द्वारा
सोया साग-बुवाई द्वारा
सलाद पत्ता- नर्सरी द्वारा
चिकोरी-बुवाई/ रोपाई द्वारा
पार्सले-बुवाई/रोपाई द्वारा
 
गोभी कुल की सब्जियाँ-
फूलगोभी-नर्सरी
ब्रोकोली-नर्सरी
पत्तागोभी-नर्सरी
चाइनीज पत्ता गोभी- नर्सरी
लाल पत्ता गोभी-नर्सरी
ब्रुसेल्स स्प्राउट- नर्सरी
केल-नर्सरी
पाकचोई-नर्सरी
 
तने वाली सब्जियाँ-
गांठ गोभी-नर्सरी
आलू-कन्द बुवाई
(सत्य प्रमाणित बीज/TPS- नर्सरी द्वारा)
 
बल्ब वाली सब्जियां-
प्याज-नर्सरी
लहसुन-बुवाई
 
फल वाली सब्जियां-
टमाटर-नर्सरी
चेरी टमाटर-नर्सरी
बैगन-नर्सरी
मिर्च -नर्सरी
शिमला मिर्च-नर्सरी
फ्रेंच बीन-बुवाई द्वारा
सेम-बुवाई द्वारा
मटर-बुवाई द्वारा
स्वीट कॉर्न-बुवाई द्वारा
बेबी कॉर्न-बुवाई द्वारा
लौकी-बुवाई
करेला-बुवाई
छप्पनकद्दू-बुवाई
कद्दू-बुवाई
 
जड़ वाली सब्जी-
गाजर-बुवाई द्वारा
मुली-बुवाई द्वारा
शलजम-बुवाई द्वारा
चुकन्दर- बुवाई द्वारा/नर्सरी भी
 
विशेष-
1- चुकन्दर ऐसी जड़ वाली एकमात्र सब्जी जो सीधी बुवाई के अलावा नर्सरी से लगाने पर बड़े और व्यवस्थित दूरी पर लगने से  बढिया क्वालिटी देती है।
 
2- फूलगोभी में स्थानीय जलवायु में परिवर्तन के कारण करीब बीज चयन के लिये पिछली बार से हर 15 दिन में किस्मे बदलती रहनी चाहिये। ऐसा अक्सर अनुभव किया गया है कि अगेती किस्म पछेती समय मे लगने से छोटे आकार की या फिर जल्द ही खराब क्वालिटी का फूल गोभी उत्त्पन्न करती है समान व्यवहार भी पछेती किस्म अगेती मौसम प्रणाली के अंतर्गत कर जाती हैं।
 
3- जड़ो वाली खासतौर पर गाजर को मेढ़ों पर लगाने से मुख्य फसल बीच अतिरिक्त उपज और स्थानिक ऊँचाई स्वरूप बढ़िया उत्पाद मिलना निश्चित हो जाता है।
 
4- फसल बीच तेजी से बढ़ने और ज्यादा पानी चाहने के विशेष गुण रखने वाली स्वीटकॉर्न, बेबीकॉर्न जैसी फसल को सिंचाई ककी नाली के ऊपर लगाने से साधन का समुचित प्रयोग और चिड़ियों को बैठेने का उचित प्राकृतिक संसाधन प्रदान होने से जैविक रूप में कीट नियंत्रण करने में सुविधा रहती है।
 
5-सभी फसलों बीच उचित कीट ध्यान आकर्षित करने वाली फसल जैसे गेंदा और धनिया आय का अतिरिक्त साधन बन कर उभरती है। किसान भाई गेंदा हर फसल के बीच कुछ निश्चित पंक्तियों और खासतौर पर खेत के किनारों पर जरूर लगायें।
 
6- ठंड के मौसम में फसल को शीत/पाले से बचाव के लिए 1 लीटर देसी गाय का गौमूत्र या फिर सल्फर 60 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।
 
7- रबी/ठंड में जीवामृत जैसे जैविक उत्पाद को 3 दिन के बजाय 5 दिन में सही बनना सुनिश्चित समझे और इसके बाद और 12 दिन के अंदर ही प्रयोग करें। 
जीवामृत बनाने की विधि पूर्व में दी जा चुकी है।
 
 
डॉ. शुभम कुमार कुलश्रेष्ठ,
सहायक प्राध्यापक- उद्यान विज्ञान विभाग
रवींद्रनाथ टैगोर विश्विद्यालय, रायसेन,
मध्यप्रदेश।
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