Sunday 25th of October 2026 09:03:56 AM

Breaking News
  •  NIA कोर्ट का यासीन मलिक समेत 7 पर मुकदमा चलाने का आदेश |
  • देहरादून में “किताब कौतिक” मेले में उमड़ी पाठकों की भीड़ |
  • काशी तमिल संगमम का पाचवा संस्करण 28 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 5 Mar 2019 12:18 PM |   2989 views

बेदखली का दर्द पैदा करता 13 सूत्रीय फार्मूला

आज 5 मार्च को भारत बंद का आयोजन किया गया है। इस बंद में देश के तमाम सियासी पार्टियां और सामाजिक ,सांस्कृतिक संगठन भाग ले रहे हैं। बंद के दो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। पहला इस देश में सदियों से जंगल में रह रहे आदिवासी परिवारों को वन से निकालने का आदेश और दूसरा उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में विभागवार आरक्षण और 13 सूत्रीय फार्मूला।इस देश में आदिवासी हमारे भाई बहन हैं और उतने ही भारतीय हैं ,जितने कि देश का प्रधानमंत्री और देश के सांसद। उनकी जीविका का साधन जंगलात रहे हैं, उनके जीवन की धड़कन और उनके अस्तित्व की बुनियाद रहे हैं। इन वनों से इन्हें बेदखल करना ऐसे ही है,जैसे जल से मछली निकालकर कर जमीं पर ला देना।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने १० लाख आदिवासियों को जंगल से बेदखल करने के अपने आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है,किन्तु इसका कोई हल नहीं निकाला गया। भारतीय संसद को इस मुद्दे का हल निकालना ही होगा। आज का बंद इन्हीं विपन्न, अशिक्षित ,असहाय और,व्यवस्था के संस्थानों में पहुँच से बाहर भारतीय समाज का अभिन्न अंग आदिवासी भाई बहनों के साथ पुरे देश के संवेदनशील लोगों के खड़ा होने और उनके दर्द को अपना समझने का एक महा समर्थन अभियान है।  दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा ओबी सी ,एस सी , एस टी को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सहायक प्रोफेसर ,एसोसिएट प्रोफेसर आदि बनने से बंचित करने की व्यवस्था है।
भारत सरकार द्वारा विभागवार आरक्षण और उसमें रिक्तियों के निर्धारण हेतु 13 सूत्रीय फॉर्मूले से उच्च शिक्षण संस्थाओं ,शोध केंद्रों ,विश्वविद्यालयों आदि में ओबीसी , एस सी , एस टी के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं के बराबर हो जायेगा। 100 जगहों में मात्र 10 पद ओबीसी ,एस सी,एसटी के लिए होंगे। वैसे भी पहले से उच्च शिक्षण संस्थाओं में इनका प्रतिनिधित्व नगण्य है। इस व्यवस्था से और कम हो जायेगा।
सभी जानते हैं कि उच्च शैक्षणिक संस्थाओं और शोध संस्थानो से ही ज्ञान का उत्पादन होता है। यहीं से विभिन्न सामाजिक ,आर्थिक ,सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर विमर्श होता है और विभिन्न समस्याओं पर शोध कर उनके समाधान की भी दृष्टि और दिशा तय होती है। इन संस्थानों में ओबीसी ,एस सी ,एस टी का समुचित भागीदारी न होने से इन संस्थानों में मात्र देश के एक वर्ग का ही विमर्श भारतीय विमर्श बन कर रह जायेगा। पहले से ही इस देश में एक प्रभुता संम्पन और वर्णवादी सोच के लोगो का ही विमर्श राष्ट्रीय विमर्श बन गया है,और इस एकांगी विमर्श से देश की बहुलतावादी संस्कृति और सोच को बहुत अधिक क्षति पहुंच चुकी है और आगे बहुत अधिक क्षति होगी। भारतीय समाज के बहुसंख्यको की समस्या और उनके विमर्श को कोई स्थान नहीं मिलेगा। आरएसएस के सोच को ही और उनके ही विचार संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

                                                                     (तपेंद्र प्रसाद शाक्य ,राष्ट्रीय अध्यक्ष सम्यक पार्टी )

Facebook Comments