थाली का बदला स्वाद: खेती और जीवनशैली से बाज़ार तक की कहानी
आमतौर पर जेन-जी (1997 – 2012), जेन- एल्फा (2013 से आगे) की पीढ़ी ये बातें अपने बुजुर्गों (जेन एक्स- 1965 से 1980 और जेन वाई – 1981 से 1996) के
आमतौर पर जेन-जी (1997 – 2012), जेन- एल्फा (2013 से आगे) की पीढ़ी ये बातें अपने बुजुर्गों (जेन एक्स- 1965 से 1980 और जेन वाई – 1981 से 1996) के
भाटपाररानी -कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), देवरिया में आज से आर्य प्रोजेक्ट के तहत मशरूम की खेती पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं
खेती केवल भोजन उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। यह अब तकनीक, नवाचार और विज्ञान से जुड़ी प्रक्रिया है, जो किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ पर्यावरण और भविष्य
अमेठी। राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत खेत तालाब योजना जनपद अमेठी के किसानों के लिए जल संरक्षण और अतिरिक्त आय का बेहतर साधन साबित हो रही है। इसी क्रम में विकास
अमेठी- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं पर ड्राप मोर क्राप माइक्रोइरीगेशन योजना के अंतर्गत जनपद अमेठी के ग्राम रजनपुर, विकास खण्ड सिंहपुर निवासी कृषक भारतेन्दु सिंह, पुत्र श्याम बिहारी सिंह
कुशीनगर- आज जलवायु परिवर्तन किसानो को चुनौती दे रही है | वर्षा में कमी आने से किसानों की धान की फसल खराब होती देख ,कृषि विज्ञान केंद्र कुशीनगर के वैज्ञानिको
देवरिया -किसान दिवस का आयोजन गांधी सभागार, विकास भवन, देवरिया में किया गया। सर्वप्रथम उप कृषि निदेशक, देवरिया ने उपस्थित कृषकों को गत माह में आयोजित किसान दिवस में प्राप्त
कुशीनगर-जिला कृषि रक्षा अधिकारी मेनका सिंह ने जनपद के किसान भाईयों को अवगत कराया है, कि फसलो के रोग/कीटों से बचाने के लिये कृषि एवं कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने
भाटपाररानी -भाकृअनुप कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना, देवरिया के विशेषज्ञों द्वारा ग्राम जगाथा, भाटपार रानी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया| जिसमें सब्जियों और फलों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
भारतीय किसान केवल खेतों का मजदूर नहीं, बल्कि इस देश का अन्नदाता और असल रीढ़ रहा है। कोविड-19 जैसी नकारात्मक अर्थव्यवस्था के समय भी किसानों की खेती ने ही भारत
भारतीय किसान केवल खेतों का मजदूर नहीं, बल्कि इस देश का अन्नदाता और असल रीढ़ रहा है। कोविड-19 जैसी नकारात्मक अर्थव्यवस्था के समय भी किसानों की खेती ने ही भारत