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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 May 2021 6:38 PM |   1062 views

“बुद्ध के अनुशासन में कल्याण की भावना” – प्रो वैद्यनाथ लाभ

नव नालन्दा महाविहार नालन्दा में भगवान बुद्ध के जन्म, बुद्धत्व प्राप्ति और महापरिनिर्वाण के पावन दिवस बुद्ध जयन्ती के रूप बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महाविहार परिवार के सदस्यों ने कोविड-19 के लिए निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया। इसके बाद नव नालन्दा महाविहार के कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ की अध्यक्षता में “वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता” विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया।
 
इस वेबिनार में महाविहार के शैक्षणिक एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों ने भाग लिया एवं वेबिनार के ज्वलन्त विषय पर अपने-अपने विचार रखे। परिचर्चा में मुख्य रूप से प्रो राम नक्षत्र प्रसाद, प्रो. सुशिम दुबे, डॉ मुकेश वर्मा, डॉ राजेश मिश्र, डॉ विश्वजीत कुमार, डॉ के के पाण्डेय, डॉ श्रीकान्त सिंह आदि वक्ताओं ने विषयगत विचार रखे।
 
कार्यक्रम के अन्त में कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ जी ने अध्यक्षीय वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि बौद्धधर्म दुनिया को हमारा सर्वोत्कृष्ट उपहार है। बुद्ध केवल एशिया नहीं अपितु विश्व के  पथ-  प्रदर्शक थे । बुद्ध के अनुशासन में कल्याण की भावना थी, उनकी डाँट  में  करुणा थी। बुद्ध ने मानव चेतना को सर्वोपरि माना। कर्मवाद और मानववाद की उनकी प्रतिष्ठा उल्लेख्य है। बौद्ध धर्म ‘धर्म’ के साथ ‘ एक व्यावहारिक रास्ता  एवं आचार संहिता भी है। हमें बुरे से बचते हुए अच्छे मार्ग पर चलना चाहिए:  दोंनोंं  क्रियाएं एक साथ करनी होंगी ।  सबसे पहले   हमें मनुष्य बनना चाहिए । कोविड-19, आतंकवाद , हिंसा आदि को बुद्ध – की शिक्षाओं   के प्रकाश में देखें तो आज उचित रास्ता निकल सकता है। 
 
कुलपति ने इतिहास के साथ छेड़- छाड़ या उसकी अपने अनुरूप व्याख्या के लिए औपनिवेशिक मानसिकता वाले इतिहासकारों को इंगित किया। उन्होंने बुद्ध को नेपाली सिद्ध किए जाने को आप्रासंगिक बताया क्योंकि  उस समय तो लुम्बिनी तक मगध साम्राज्य था। यही कारण था कि सम्राट  अशोक ने मालगुज़ारी 1/5 से 1/8 कर दिया था। भारत ने कभी हमला नहीं किया। आज हमें विश्व के समक्ष  अपने विचारों को सही ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। भारतीय व वैश्विक स्तर पर ” जिसकी लाठी उसकी भैंस” में  हमारा विश्वास नहीं  है। बुद्ध को ‘ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य’ में भी ‘ठीक से देखने’ की ज़रूरत है।
 
 
प्रो आर एन प्रसाद ने पूर्णिमा को पूर्णता से जोड़ा।कर्तव्य के क्षेत्र में पूर्णता। सत्पात्र के लिए दान का चित्त होना चाहिए । त्रिविध पारमी तीस बन जाती है। सुशिम दुबे ने कहा कि बुद्ध अंदर के भावों को जगाते हुए विपरीत परिस्थितियों के पार जा पाए। डॉ  विश्वजीत कुमार के अनुसार  बुद्ध ने मानवता को आगे ले जाने का कार्य किया।  डॉ श्रीकांत सिंह   के अनुसार बुद्ध ने स्वयं के अद्ध्ययन का यत्न किया।  दूसरे से अधिक अपने को समझा उन्होंने। डॉ हरे कृष्ण तिवारी ने कहा कि करुणा, प्रेम और सहानुभूति  सदा प्रासंगिक बने रहेंगे। डॉ मुकेश वर्मा का मत था कि सभी एक दूसरे से जुड़े हैं।सिद्धांत की व्यवहार में लाने की ज़रूरत है। डॉ के के पाण्डेय के अनुसार मेत्ता,करुणा, मुदिता, उपेक्षा को आधार बनाएं। डॉ  राजेश मिश्र ने स्वयं की देखने,अतिवाद से बचने,संवेदनशील होने तथा मैं की भावना से रहित होने पर बल दिया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ प्रदीप कुमार दास ने किया।  उन्होंने आज के दिन को विश्व के लिये मंगलकारी बताया।
 
बुद्ध पूर्णिमा हमें भीतर से प्रकाशित करने का दिन है। वेबिबार में मैडम कुलपति डॉ नीहारिका लाभ के साथ नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय के शैक्षिक , शिक्षकेतर सदस्य एवं  सुनील सिन्हा  रजिस्ट्रार आदि उपस्थित थे।
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