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By : Kripa Shankar | Published Date : 6 Feb 2021 2:49 PM |   674 views

कुण्डलियां ( वेलेंटाइन डे)

कहे वेलेंटाइन डे, छोड़ो अपनी शर्म
इज़हार करो प्यार का, यही आज का धर्म
यही आज का धर्म,न सोचें ऊपर नीचे
भले उसकी जूती, पड़ेंगे आगे पीछे
कहते हैं”आग्नेय”,मर्द वही जो सब सहे
सभ्यता रोमन की, बात बेशर्मी की कहे
जीवन में जो कभी भी, नहीं किया है प्यार
भले बुढ़ापा आ गया,कर ले वो इज़हार
कर ले वो इज़हार, गुड़िया या बुढ़िया भले
सिर पे या पीठ पे,जूता चप्पल जो चले
कहते हैं”आग्नेय”,गर रोमन के चलन में
जाएंगे जो आप,दिन भी श्याम जीवन में
दिन फरवरी चौदह को, रोमन का त्यौहार
कुछ मूर्खों ने कर लिया,उसको अंगीकार
उसको अंगीकार, जो न हमारी सभ्यता
तो अपने देश में, कैसे आए भव्यता
कहते हैं”आग्नेय”, फिर शीष पे जूते गिन
अगर किया इज़हार, अपने प्यार का उस दिन
एक था वेलेंटाइन, अच्छा खासा संत।
 फिर भी राजा ने किया, फांसी से ही अंत
फांसी से ही अंत, क्योंकि वो नासमझ रहा
खुदा का प्यार सदा, बांटे संत जहां- तहां
कहते हैं”आग्नेय”, था अर्थ संत का नेक
समझ ग‌ए हैं मूर्ख, आवारागर्दी एक
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