कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने नवनियुक्त प्राविधिक सहायकों को किया संबोधित
देवरिया-कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आज कृषि प्रशिक्षण केंद्र, बैतालपुर, देवरिया में नवनियुक्त प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी के 10 दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं का स्वागत किया और उन्हें संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षुओं से संवाद करते हुए कृषि विभाग की कार्यप्रणाली, आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रयोग, मृदा परीक्षण, फसल बीमा तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्राविधिक सहायक किसान और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे कार्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि सीधे खेतों में जाकर किसानों से संवाद करें और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल बीमा तथा अनुदान संबंधी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।उन्होंने बताया कि रबी सीजन 2026 में लगभग 12 लाख कुंतल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को 10 लाख मिनी किट वितरित की गई हैं। कृषि निवेश ऑनलाइन बुकिंग और ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों को कृषि संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज आवश्यक हैं। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों में निरंतर शोध एवं नई तकनीकों का विकास किया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने रबी की विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में देश आत्मनिर्भर हुआ है, लेकिन दलहन और तिलहन के क्षेत्र में अभी और प्रयासों की जरूरत है। इसके लिए सरकार किसानों को मिनी किट के माध्यम से निःशुल्क बीज उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि 40 जनपदों में लगभग सात लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहन एवं तिलहन की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। गन्ने के साथ दलहन और तिलहन की अंतरवर्तीय खेती को प्रोत्साहित कर इन फसलों का रकबा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशिक्षुओं से किसानों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि खेतों में बाढ़ सिंचाई पद्धति के उपयोग को कम कर भूमिगत जल का संरक्षण किया जाए। साथ ही खेती में पोषणयुक्त फसलों को शामिल करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए। रागी, मड़ुआ, ज्वार, बाजरा, जौ, कंगनी और कुटकी जैसी फसलें पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत किसानों को जागरूक कर आधुनिक, टिकाऊ और पोषणयुक्त कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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